उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में बिजली से जुड़ी दुर्घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, जो अब जानलेवा साबित हो रही हैं। इन हादसों के पीछे सिर्फ तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि बिजली विभाग की ढीली और लापरवाह व्यवस्था को मुख्य कारण माना जा रहा है।
- देवरिया में बिजली संबंधी हादसों में चिंताजनक वृद्धि दर्ज की गई है।
- कई मौतों के पीछे ढीले तार, खुली वायरिंग और जर्जर खंभे मुख्य वजह हैं।
- स्थानीय निवासियों में बिजली विभाग के प्रति गहरा आक्रोश और असंतोष व्याप्त है।
- सुरक्षा मानकों की घोर अनदेखी और रखरखाव में भारी कमी उजागर हुई है।
- प्रशासन से इन मौतों के लिए जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई की मांग।
देवरिया जिले में बिजली वितरण प्रणाली की पुरानी और जर्जर हालत एक बड़ी समस्या बन चुकी है। कई इलाकों में बिजली के तार खुले पड़े हैं, खंभे कमजोर हो चुके हैं और ट्रांसफार्मर सुरक्षा घेरे से बाहर हैं। मॉनसून के दौरान यह स्थिति और भी भयावह हो जाती है, जब बारिश के पानी से करंट फैलने का खतरा बढ़ जाता है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद विभाग इन समस्याओं पर ध्यान नहीं देता, जिससे आए दिन लोग अपनी जान गंवा रहे हैं।
इन हादसों का सीधा असर उन गरीब परिवारों पर पड़ रहा है, जो अपने कमाऊ सदस्य को खो देते हैं। समाज में भय का माहौल है और बिजली विभाग के प्रति अविश्वास गहरा रहा है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इन मौतों के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए व्यापक स्तर पर बिजली के बुनियादी ढांचे में सुधार, नियमित रखरखाव और सुरक्षा प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करना अनिवार्य है। अन्यथा, यह 'ढीली व्यवस्था' यूं ही लोगों की जान लेती रहेगी।