राजधानी लखनऊ में गिरते भूजल स्तर और बढ़ते जल संकट के बीच वर्षा जल संचयन की अनदेखी एक गंभीर चिंता का विषय बन गई है। अब इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) और अन्य संबंधित विभागों से सख्त जवाब मांगा गया है, ताकि लापरवाही पर लगाम लगाई जा सके।
- लखनऊ में भूजल स्तर में लगातार खतरनाक गिरावट दर्ज की जा रही है।
- शहर में वर्षा जल संचयन प्रणालियों का क्रियान्वयन संतोषजनक नहीं है।
- एलडीए और अन्य विभागों पर नियमों के प्रभावी पालन में ढिलाई का आरोप है।
- कई नई इमारतों और सरकारी परिसरों में भी संचयन प्रणाली गायब या निष्क्रिय है।
- प्रशासन ने अब इस मुद्दे पर संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा है।
लखनऊ शहर तेजी से शहरीकरण की ओर बढ़ रहा है, लेकिन इसके साथ ही जल संसाधनों पर दबाव भी बढ़ रहा है। दशकों से भूजल ही शहर की प्यास बुझाने का मुख्य स्रोत रहा है, पर अब यह लगातार नीचे जा रहा है। वर्षा जल संचयन को अनिवार्य करने वाले नियम वर्षों से लागू हैं, फिर भी जमीनी स्तर पर इनकी अनदेखी आम बात है। कई आवासीय और व्यावसायिक परियोजनाओं में तो ये प्रणालियां कागजों पर ही सिमट कर रह गई हैं, जबकि कुछ स्थानों पर स्थापित प्रणालियां भी रखरखाव के अभाव में निष्क्रिय पड़ी हैं। इसी गंभीर स्थिति को देखते हुए अब प्रशासन ने इस पर संज्ञान लिया है।
इस जवाबदेही की मांग से उम्मीद है कि एलडीए और अन्य विभाग अपनी जिम्मेदारियों को गंभीरता से लेंगे। उन्हें न केवल पिछली कमियों का स्पष्टीकरण देना होगा, बल्कि भविष्य के लिए एक ठोस कार्ययोजना भी प्रस्तुत करनी पड़ सकती है। यह कदम शहर में वर्षा जल संचयन के प्रति जागरूकता और क्रियान्वयन को बढ़ावा दे सकता है, जिससे भूजल स्तर में सुधार की संभावना बनेगी। यदि विभाग प्रभावी कदम उठाते हैं, तो यह लखनऊ के जल संकट को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है, साथ ही अन्य शहरों के लिए भी एक मिसाल कायम कर सकता है।