महाराजगंज जिले में बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग ने एक बड़ा कदम उठाया है। अनियमितताओं के चलते 241 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय रोक दिया गया है और अब उनसे रिकवरी की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी। यह कार्रवाई फर्जी लाभार्थियों के नाम पर मानदेय उठाने के मामले में की गई है।
- महाराजगंज में 241 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय तत्काल प्रभाव से रोका गया।
- फर्जी लाभार्थियों के नाम पर मानदेय लेने की शिकायतें सही पाई गईं।
- बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग ने विस्तृत जांच के बाद यह सख्त कार्रवाई की।
- रोके गए मानदेय की वसूली (रिकवरी) के लिए भी प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
- इस कार्रवाई से सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता लाने का मजबूत संदेश दिया गया है।
यह पूरा मामला बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग द्वारा चलाए जा रहे विभिन्न कार्यक्रमों में वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा है। विभाग को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ऐसे लाभार्थियों के नाम पर मानदेय उठा रही हैं, जो या तो योजना के पात्र नहीं हैं या वास्तव में मौजूद ही नहीं हैं। इन गंभीर शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए, विभाग ने एक विस्तृत जांच अभियान चलाया। जांच में पाया गया कि 241 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने फर्जीवाड़ा कर सरकारी धन का दुरुपयोग किया। इसी आधार पर विभाग ने सख्त कदम उठाते हुए इन सभी कार्यकर्ताओं का मानदेय तत्काल प्रभाव से रोकने का आदेश जारी किया है।
इस कार्रवाई से जिले भर की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के बीच हड़कंप मच गया है और यह अन्य जिलों के लिए भी एक चेतावनी है। जहां एक ओर यह कदम सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण है, वहीं दूसरी ओर इससे प्रभावित कार्यकर्ताओं के परिवारों पर सीधा आर्थिक बोझ पड़ेगा। विभाग ने स्पष्ट किया है कि गलत तरीके से लिए गए मानदेय की वसूली के लिए रिकवरी की प्रक्रिया भी जल्द ही शुरू की जाएगी। भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए विभाग को अपने निगरानी तंत्र को और अधिक मजबूत करने, नियमित ऑडिट करने तथा डिजिटल सत्यापन जैसी प्रणालियों को प्रभावी ढंग से लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया जा रहा है।