ठंड का प्रकोप बढ़ने के साथ ही कुशीनगर के मेडिकल कॉलेज में सांस संबंधी बीमारियों से जूझ रहे मरीजों की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि दर्ज की गई है। अस्पताल प्रशासन और चिकित्सकों के लिए यह स्थिति एक नई चुनौती बन गई है।
- कुशीनगर मेडिकल कॉलेज में शीतलहर के कारण सांस के मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है।
- ओपीडी और इमरजेंसी दोनों में ऐसे मरीजों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं।
- चिकित्सकों ने बुजुर्गों, बच्चों और पहले से बीमार लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है।
- अस्पताल में बिस्तर और दवाइयों की व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव देखा जा रहा है।
- वायु प्रदूषण और ठंड का मेल मरीजों की स्थिति को और गंभीर बना रहा है।
पड़ोसी जिलों सहित कुशीनगर में पिछले कुछ दिनों से जारी कड़ाके की ठंड और गिरते तापमान ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। सुबह और शाम को घने कोहरे के साथ चलने वाली बर्फीली हवाओं ने लोगों को घरों में दुबकने पर मजबूर कर दिया है। ऐसे में, श्वसन तंत्र से संबंधित बीमारियां जैसे अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और निमोनिया के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों का कहना है कि ठंड के कारण फेफड़ों में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है, जिससे सांस लेने में तकलीफ और अन्य जटिलताएं पैदा होती हैं।
मरीजों की बढ़ती संख्या ने कुशीनगर मेडिकल कॉलेज के संसाधनों पर भारी दबाव डाल दिया है। ओपीडी में लंबी कतारें लगने के साथ-साथ इमरजेंसी वार्ड और इनडोर यूनिट में भी मरीजों के लिए बिस्तर ढूंढना मुश्किल हो गया है। डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ को अतिरिक्त समय देना पड़ रहा है। प्रशासन को दवाओं और ऑक्सीजन की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए विशेष कदम उठाने पड़ रहे हैं। विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि लोग ठंड से बचाव करें, गर्म कपड़े पहनें, गर्म तरल पदार्थों का सेवन करें और अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचें, खासकर कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोग।