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देवरिया: हाईटेंशन तार टूटने से 48 घंटे ठप रही बिजली, जनजीवन अस्त-व्यस्त

उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में एक हाईटेंशन बिजली का तार टूट जाने से लगभग 48 घंटे तक बिजली आपूर्ति बाधित रही। इस लंबी कटौती ने स्थानीय निवासियों के दैनिक जीवन को बुरी तरह प्रभावित किया, जिससे गर्मी और पानी की किल्लत जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा।

मुख्य पॉइंट
  • देवरिया के बरहज ब्लॉक क्षेत्र में मंगलवार सुबह हाईटेंशन तार टूट गया।
  • तार टूटने के कारण करीब दो दिनों तक बिजली आपूर्ति पूरी तरह ठप रही।
  • भीषण गर्मी में बिजली न होने से पानी की आपूर्ति भी बाधित हुई।
  • स्थानीय व्यापारियों और छात्रों को सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ी।
  • बिजली विभाग पर लापरवाही और धीमी मरम्मत कार्य का आरोप लगाया गया।
देवरिया: हाईटेंशन तार टूटने से 48 घंटे ठप रही बिजली, जनजीवन अस्त-व्यस्त

यह घटना देवरिया जिले के बरहज ब्लॉक अंतर्गत एक प्रमुख ग्रामीण क्षेत्र में मंगलवार सुबह लगभग 8 बजे हुई, जब अचानक एक पुराना हाईटेंशन बिजली का तार टूटकर गिर गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, तार गिरने के साथ ही जोरदार आवाज हुई और पूरे इलाके की बिजली गुल हो गई। स्थानीय लोगों ने तत्काल बिजली विभाग को सूचना दी, लेकिन मरम्मत कार्य शुरू होने में काफी देरी हुई। इस अप्रत्याशित घटना ने क्षेत्र में रहने वाले हजारों परिवारों को अंधेरे में धकेल दिया, जिससे सामान्य जनजीवन पूरी तरह से थम गया।

लगातार 48 घंटे तक बिजली गुल रहने से क्षेत्र में हाहाकार मच गया। भीषण गर्मी के बीच बिजली न होने से घरों में लगे पंखे, कूलर और एयर कंडीशनर बंद हो गए, जिससे लोगों का जीना मुहाल हो गया। सबसे बड़ी समस्या पेयजल की थी, क्योंकि मोटर और समर्सिबल पंप न चलने के कारण पानी की आपूर्ति ठप हो गई। छोटे दुकानदार, जिनकी आजीविका बिजली पर निर्भर करती है, उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ा। छात्रों की पढ़ाई बाधित हुई और रात में सुरक्षा संबंधी चिंताएं भी बढ़ गईं। स्थानीय निवासियों ने बिजली विभाग के खिलाफ प्रदर्शन कर त्वरित कार्रवाई की मांग की, जिसके बाद बुधवार देर शाम बिजली आपूर्ति बहाल हो पाई।

Summary
देवरिया में हाईटेंशन तार टूटने से हुई 48 घंटे की बिजली कटौती ने स्थानीय जीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया, जिससे पानी और गर्मी जैसी बुनियादी समस्याओं ने लोगों को परेशान किया। इस घटना ने बिजली विभाग की बुनियादी ढांचा रखरखाव और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
स्रोत: सार्वजनिक रूप से उपलब्ध समाचार स्रोत
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