उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के संचालन को लेकर एक बार फिर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। स्थानीय पूर्व विधायक ने सरकार को सीधी चेतावनी देते हुए कहा है कि या तो हवाई अड्डे को पूरी क्षमता से चालू किया जाए, या फिर किसानों की अधिग्रहित जमीन उन्हें वापस की जाए।
- पूर्व विधायक ने कुशीनगर एयरपोर्ट के पूर्ण संचालन की मांग की।
- मांग पूरी न होने पर किसानों की अधिग्रहित जमीन लौटाने की चेतावनी।
- किसानों को मुआवजे के बावजूद जमीन के उपयोग न होने से असंतोष।
- एयरपोर्ट के नाम पर ली गई भूमि का दशकों से अधूरा उपयोग।
- स्थानीय किसानों के हितों को लेकर मुखर हुई आवाज।
कुशीनगर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे का शिलान्यास दशकों पहले हुआ था और इसके लिए हजारों किसानों की बहुमूल्य कृषि भूमि अधिग्रहित की गई थी। किसानों ने क्षेत्र के विकास और रोजगार के नए अवसरों की उम्मीद में अपनी जमीनें सरकार को सौंपी थीं। हालांकि, भूमि अधिग्रहण के वर्षों बाद भी हवाई अड्डा पूरी क्षमता से संचालित नहीं हो पा रहा है, जिससे स्थानीय लोगों और विशेषकर भूमिहीन हुए किसानों में गहरा असंतोष व्याप्त है। कई उड़ानें रद्द होने और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की कमी ने इस मुद्दे को और हवा दी है।
पूर्व विधायक की यह मांग सरकार के लिए एक नई चुनौती खड़ी कर सकती है। यदि इस मुद्दे पर जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो किसानों का गुस्सा सड़क पर उतर सकता है, जिससे बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शनों की आशंका है। यह मामला न केवल किसानों के जीवनयापन से जुड़ा है, बल्कि कुशीनगर जैसे महत्वपूर्ण बौद्ध तीर्थस्थल के पर्यटन और आर्थिक विकास पर भी सीधा असर डालता है। सरकार पर अब यह दबाव है कि वह या तो हवाई अड्डे के संचालन को गति दे, अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की संख्या बढ़ाए, या फिर उन किसानों के लिए कोई वैकल्पिक समाधान प्रस्तुत करे जिनकी जमीनें दशकों से निष्क्रिय पड़ी हैं। यह मुद्दा आगामी चुनावों में भी एक अहम भूमिका निभा सकता है।