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राजघाट पुल निर्माण में बड़ी अड़चन: टेढ़े पिलर ने रोकी यमुना की धारा, लागत 289 करोड़ पार

दिल्ली के राजघाट पर बन रहे नए पुल का निर्माण कार्य एक गंभीर तकनीकी खामी के कारण एक साल से अधिक समय से बाधित है। एक मुख्य पिलर के तिरछे हो जाने से यमुना नदी की धारा को मोड़कर रखना पड़ा है, जिससे परियोजना की लागत बढ़कर 289 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।

मुख्य पॉइंट
  • राजघाट पुल का एक मुख्य पिलर पिछले एक साल से तिरछा बना हुआ है।
  • पिलर सीधा न होने के कारण यमुना नदी की धारा को मोड़कर रखा गया है।
  • इस परियोजना पर अब कुल 289 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
  • तकनीकी विशेषज्ञ पिलर को सीधा करने की चुनौतियों से जूझ रहे हैं।
  • निर्माण में देरी से राजधानी के यातायात और पर्यावरण पर असर पड़ रहा है।
राजघाट पुल निर्माण में बड़ी अड़चन: टेढ़े पिलर ने रोकी यमुना की धारा, लागत 289 करोड़ पार

राजधानी दिल्ली में यातायात सुगम बनाने के उद्देश्य से राजघाट पर नए पुल का निर्माण कार्य प्रगति पर था, लेकिन पिछले एक साल से यह परियोजना एक अप्रत्याशित बाधा का सामना कर रही है। पुल के एक अहम पिलर में झुकाव आ गया, जिसे सीधा करने के सभी प्रयास अब तक विफल रहे हैं। इस गंभीर तकनीकी समस्या के कारण, निर्माण स्थल पर काम जारी रखने के लिए यमुना नदी की धारा को मोड़कर रखना पड़ा है, जिससे न केवल परियोजना की समय-सीमा प्रभावित हुई है, बल्कि इसकी लागत में भी भारी वृद्धि हुई है। यह स्थिति निर्माण एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है।

इस लंबी देरी और बढ़ती लागत का बोझ अंततः करदाताओं पर पड़ेगा, क्योंकि परियोजना का अनुमानित खर्च 289 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। यमुना नदी की धारा को एक साल से अधिक समय तक मोड़े रखने से नदी के पारिस्थितिकी तंत्र और जल प्रवाह पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका है। इसके अलावा, पुल के समय पर पूरा न होने से राजधानी में यातायात की समस्या बनी हुई है, जिससे यात्रियों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। यह घटना बड़े निर्माण परियोजनाओं में गुणवत्ता नियंत्रण और इंजीनियरिंग मानकों पर गंभीर सवाल खड़े करती है, जिसकी जवाबदेही तय होना आवश्यक है।

Summary
राजघाट पुल का एक टेढ़ा पिलर पिछले एक साल से निर्माण में बड़ी बाधा बना हुआ है, जिसके चलते यमुना की धारा मोड़ी गई है और परियोजना की लागत 289 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। यह स्थिति न केवल तकनीकी चुनौतियों को दर्शाती है, बल्कि परियोजना प्रबंधन और पर्यावरण पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।
स्रोत: सार्वजनिक रूप से उपलब्ध समाचार स्रोत
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