दिवाली के शुभ अवसर से पहले गोरखपुर के प्रसिद्ध टेराकोटा शिल्पकारों के लिए खुशियों की सौगात आई है। ढाई करोड़ रुपये के बंपर ऑर्डर मिलने से न केवल उनके चेहरों पर रौनक लौट आई है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई ऊर्जा मिली है।
- गोरखपुर के टेराकोटा शिल्पकारों को दिवाली से पहले रिकॉर्ड 2.5 करोड़ रुपये के ऑर्डर मिले।
- इन ऑर्डरों में दीये, गणेश-लक्ष्मी की मूर्तियां और अन्य सजावटी सामान शामिल हैं।
- बड़े ऑर्डर मिलने से स्थानीय कारीगरों और उनके परिवारों में खुशी का माहौल है।
- यह 'एक जिला एक उत्पाद' (ODOP) योजना की सफलता का एक बड़ा उदाहरण है।
- इन ऑर्डरों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है और रोजगार के अवसर बढ़े हैं।
गोरखपुर का टेराकोटा शिल्प सदियों पुराना है और अपनी विशिष्टता तथा कलात्मकता के लिए देश-विदेश में प्रसिद्ध है। दिवाली का त्योहार पारंपरिक रूप से मिट्टी के दीयों, देवी-देवताओं की मूर्तियों और सजावटी सामानों की मांग को कई गुना बढ़ा देता है। इस वर्ष, स्थानीय प्रशासन और 'एक जिला एक उत्पाद' (ODOP) योजना के तहत मिल रहे प्रोत्साहन ने इस मांग को अप्रत्याशित ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया है। कारीगरों को अपने उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचाने और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बेचने में मिल रही मदद ने भी इस ऐतिहासिक सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
इन बड़े ऑर्डरों से न केवल कारीगरों की तत्काल आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, बल्कि यह उनके जीवन स्तर को सुधारने में भी सहायक होगा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे, जिससे पलायन पर रोक लग सकेगी और स्थानीय युवाओं को अपनी जड़ों से जुड़ने का मौका मिलेगा। यह सफलता स्थानीय शिल्प को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक पहचान दिलाने का मार्ग प्रशस्त करेगी, जिससे भविष्य में और भी बड़े ऑर्डर मिलने की प्रबल संभावना है। सरकार की दूरदर्शी नीतियां और कारीगरों की कड़ी मेहनत व लगन मिलकर इस प्राचीन कला को नई ऊंचाइयों पर ले जा रही है।