उत्तर प्रदेश के महाराजगंज जिले में सेल्स प्रमोशन कर्मचारियों ने अपने अधिकारों के हनन पर आवाज बुलंद की है। उन्होंने विभिन्न कंपनियों पर श्रम कानूनों के खुलेआम उल्लंघन का आरोप लगाते हुए प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है।
- न्यूनतम वेतन से कम भुगतान और अत्यधिक कार्य घंटों की शिकायत।
- सामाजिक सुरक्षा लाभों जैसे ईपीएफ और ईएसआई से वंचित रखना।
- बिना उचित नोटिस या मुआवजे के नौकरी से निकालना।
- श्रमिक संघ बनाने और सामूहिक सौदेबाजी के अधिकार का हनन।
- कंपनियों द्वारा अस्थाई और अनुबंध पर रखे जाने की प्रथा का दुरुपयोग।
सेल्स प्रमोशन कर्मचारी अक्सर विभिन्न कंपनियों के उत्पादों को बाजार में उतारने और उनकी बिक्री बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हालांकि, उन्हें अक्सर औपचारिक रोजगार अनुबंधों से बाहर रखा जाता है, जिससे वे श्रम कानूनों द्वारा प्रदत्त सुरक्षा से वंचित रह जाते हैं। महाराजगंज में भी यही स्थिति देखी जा रही है, जहां इन कर्मचारियों का कहना है कि उनकी मेहनत का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है। वे लंबे समय से बिना किसी उचित अवकाश, न्यूनतम वेतन और सामाजिक सुरक्षा के काम कर रहे हैं, जिससे उनके परिवारों पर आर्थिक और मानसिक दबाव बढ़ रहा है।
इस आवाज के उठने से स्थानीय प्रशासन और संबंधित कंपनियों पर दबाव बढ़ने की संभावना है। यदि इन शिकायतों पर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया, तो यह विरोध प्रदर्शन बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है, जिससे कंपनियों के व्यापारिक हितों को नुकसान पहुंच सकता है। प्रशासन को चाहिए कि वह इन मामलों की गंभीरता से जांच करे और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करे। यह घटना अन्य जिलों में कार्यरत सेल्स प्रमोशन कर्मचारियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन सकती है, जो समान चुनौतियों का सामना कर रहे हैं और अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने को प्रेरित हो सकते हैं।