गोरखपुर अपनी सदियों पुरानी सांस्कृतिक और साहित्यिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है। अब शहर में मौजूद दुर्लभ ग्रंथों और अमूल्य पांडुलिपियों को डिजिटल रूप दिया जाएगा, जिससे ये अनमोल धरोहरें हमेशा के लिए सुरक्षित हो सकें।
- गोरखपुर में मौजूद दुर्लभ ग्रंथों और पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण होगा।
- यह पहल सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में एक बड़ा कदम है।
- जीर्ण-शीर्ण होती जा रही ऐतिहासिक सामग्रियों को नया जीवन मिलेगा।
- शोधकर्ताओं और आम जनता के लिए इन ग्रंथों की पहुंच आसान होगी।
- भावी पीढ़ियों के लिए ज्ञान का यह खजाना सुरक्षित और सुलभ बन जाएगा।
समय के साथ-साथ अनेक दुर्लभ ग्रंथ और हस्तलिखित पांडुलिपियां भौतिक रूप से क्षीण होती जा रही हैं। नमी, कीटों और लगातार मानवीय संपर्क के कारण उनके पन्ने खराब हो रहे हैं, जिससे उनके अंदर छिपा ज्ञान लुप्त होने का खतरा मंडरा रहा है। इस गंभीर समस्या को देखते हुए गोरखपुर प्रशासन और संबंधित संस्थानों ने इन अमूल्य धरोहरों को डिजिटल माध्यम से सुरक्षित करने का निर्णय लिया है। यह प्रक्रिया न केवल उनके भौतिक क्षरण को रोकेगी, बल्कि उन्हें एक स्थायी और सुरक्षित स्वरूप प्रदान करेगी।
इस डिजिटलीकरण परियोजना का स्थानीय स्तर पर गहरा और सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। इससे गोरखपुर के पुस्तकालयों और संग्रहालयों में रखे गए ऐतिहासिक दस्तावेजों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, जो अब तक सीमित पहुंच में थे। शोधकर्ताओं, छात्रों और इतिहास प्रेमियों को अब घर बैठे या कहीं से भी इन दुर्लभ सामग्रियों तक पहुंचने की सुविधा मिलेगी, जिससे शोध और अध्ययन को एक नई दिशा मिलेगी। यह पहल गोरखपुर को ज्ञान संरक्षण और सांस्कृतिक संवर्धन के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में भी स्थापित करेगी, जिससे भविष्य में अन्य शहरों को भी ऐसी परियोजनाओं के लिए प्रेरणा मिलेगी।