देश के प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान एम्स में गंभीर किडनी रोगियों के लिए उपचार में एक बड़ी छलांग लगने वाली है। अत्याधुनिक एसएलईडी (Sustained Low-Efficiency Dialysis) मशीनों की खरीद प्रक्रिया तेज कर दी गई है, जिससे अब बेहद नाजुक मरीजों को भी सुरक्षित और प्रभावी डायलिसिस उपचार मिल सकेगा।
- एम्स में गंभीर किडनी मरीजों के लिए एसएलईडी डायलिसिस सुविधा शुरू होगी।
- एसएलईडी मशीन खरीद प्रक्रिया को प्राथमिकता से तेजी से पूरा किया जा रहा है।
- यह तकनीक उन गंभीर मरीजों के लिए सुरक्षित है जो सामान्य डायलिसिस सहन नहीं कर पाते।
- इससे आईसीयू में भर्ती और मल्टी-ऑर्गन फेलियर वाले रोगियों को विशेष लाभ मिलेगा।
- नई सुविधा से उपचार की गुणवत्ता और रोगी सुरक्षा में महत्वपूर्ण सुधार की उम्मीद है।
पारंपरिक हेमोडायलिसिस अक्सर गंभीर रूप से बीमार या हेमोडायनामिक रूप से अस्थिर मरीजों के लिए कई जोखिम पैदा कर सकता है, जिसमें रक्तचाप में अचानक गिरावट और अन्य जटिलताएं शामिल हैं। एसएलईडी तकनीक, जो पारंपरिक डायलिसिस की तुलना में धीमी और अधिक नियंत्रित होती है, ऐसे नाजुक रोगियों के लिए एक सुरक्षित और प्रभावी विकल्प प्रदान करती है। एम्स में इस उन्नत सुविधा की अनुपलब्धता के कारण अब तक कई गंभीर मरीजों को उचित उपचार नहीं मिल पाता था, जिससे उनकी जान को खतरा बना रहता था और डॉक्टरों के सामने सीमित विकल्प होते थे।
इस उन्नत सुविधा के आने से एम्स में गंभीर किडनी रोगों से जूझ रहे मरीजों की जान बचाने की दर में उल्लेखनीय सुधार होने की उम्मीद है। विशेष रूप से आईसीयू में भर्ती या मल्टी-ऑर्गन फेलियर वाले रोगियों के लिए यह तकनीक जीवनरक्षक साबित होगी, क्योंकि यह उनके शरीर पर कम तनाव डालती है। यह न केवल एम्स के मरीजों को फायदा पहुंचाएगी बल्कि देश के अन्य चिकित्सा संस्थानों के लिए भी एक मिसाल पेश करेगी, जिससे भविष्य में ऐसी उन्नत तकनीकों को अपनाने की प्रेरणा मिलेगी। यह कदम देश में क्रिटिकल केयर नेफ्रोलॉजी के मानकों को और ऊंचा उठाएगा, जिससे पूरे स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र को लाभ होगा।