देवरिया जिले में शिक्षा विभाग से जुड़ा एक बड़ा विवाद सामने आया है, जहां प्रबंधक संघ ने बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) और एक वरिष्ठ लिपिक की तत्काल गिरफ्तारी की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया है। भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के गंभीर आरोपों के बीच, इस घटना ने जिले के शैक्षिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है।
- प्रबंधक संघ ने बीएसए और लिपिक पर विद्यालयों की मान्यता में गड़बड़ी व अवैध वसूली का आरोप लगाया।
- संघ का दावा है कि उनके पास आरोपों को साबित करने के पुख्ता सबूत मौजूद हैं।
- प्रदर्शनकारियों ने जिला प्रशासन से तत्काल गिरफ्तारी और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
- चेतावनी दी गई है कि मांगें पूरी न होने पर आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
- इस घटनाक्रम ने देवरिया के शिक्षा विभाग में व्याप्त कथित भ्रष्टाचार को उजागर किया है।
यह पूरा मामला देवरिया के शिक्षा विभाग में लंबे समय से चली आ रही कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की शिकायतों से जुड़ा है। प्रबंधक संघ का आरोप है कि बीएसए और संबंधित लिपिक विद्यालयों की मान्यता, नवीनीकरण, और अन्य प्रशासनिक स्वीकृतियों के लिए अनुचित दबाव बना रहे थे और खुलेआम अवैध धन की उगाही कर रहे थे। संघ ने दावा किया है कि उनके पास इन आरोपों को पुष्ट करने वाले ऑडियो-विजुअल साक्ष्य और अन्य दस्तावेजी प्रमाण मौजूद हैं। प्रशासन पर इन शिकायतों को लगातार नजरअंदाज करने का आरोप लगाते हुए, प्रबंधक संघ ने न्याय के लिए सड़कों पर उतरने का फैसला किया है।
इस विरोध प्रदर्शन ने देवरिया के शिक्षा विभाग में एक गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। यदि ये आरोप सही साबित होते हैं, तो यह जिले की शिक्षा व्यवस्था में गहरे पैठ जमा चुके भ्रष्टाचार की भयावह तस्वीर पेश करेगा। इस आंदोलन का सीधा प्रभाव विद्यालयों के कामकाज, शिक्षकों के मनोबल और छात्रों के भविष्य पर पड़ सकता है। प्रबंधक संघ ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं और दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे अपने आंदोलन को और भी व्यापक रूप देंगे, जिससे जिले की शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह ठप हो सकती है। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस संवेदनशील मुद्दे पर क्या रुख अपनाता है और कैसे विश्वास बहाल करने का प्रयास करता है।