राज्य के राज्यपाल ने स्वास्थ्य सेवाओं में मानवीयता और संवेदनशीलता सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है। उन्होंने सभी अस्पतालों को स्पष्ट आदेश दिया है कि वे अति गंभीर मरीजों को किसी भी परिस्थिति में वापस न लौटाएं, बल्कि उनका तत्काल उपचार सुनिश्चित करें।
- राज्यपाल ने सभी अस्पतालों को गंभीर मरीजों को तुरंत भर्ती करने का आदेश दिया।
- यह निर्देश अस्पतालों द्वारा मरीजों को लौटाने की बढ़ती शिकायतों के बाद आया है।
- मानवीय दृष्टिकोण अपनाने और जीवन बचाने को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर जोर।
- उल्लंघन करने वाले अस्पतालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी गई।
- स्वास्थ्य विभाग को इस आदेश के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु निगरानी बढ़ाने के निर्देश।
हाल के दिनों में राज्य के विभिन्न हिस्सों से ऐसी कई खबरें सामने आई हैं, जहाँ अस्पतालों पर अति गंभीर मरीजों को बेड की कमी या अन्य तकनीकी कारणों का हवाला देकर वापस भेजने का आरोप लगा है। ऐसे में, मरीजों और उनके परिजनों को गंभीर संकट का सामना करना पड़ता है, और कई बार यह स्थिति जानलेवा भी साबित होती है। इन्हीं गंभीर शिकायतों और जनहित को ध्यान में रखते हुए, राज्यपाल ने इस मुद्दे पर संज्ञान लिया और स्वास्थ्य सेवाओं में जवाबदेही तथा मानवीय मूल्यों की बहाली के लिए यह महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है।
राज्यपाल के इस कड़े निर्देश का राज्य की स्वास्थ्य प्रणाली पर व्यापक और सकारात्मक प्रभाव पड़ने की उम्मीद है। यह अस्पतालों पर गंभीर मरीजों को प्राथमिकता के आधार पर भर्ती करने का दबाव बनाएगा, जिससे आम जनता में स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति विश्वास बहाल होगा। हालांकि, इसके सफल क्रियान्वयन के लिए अस्पतालों को अपनी बुनियादी सुविधाओं और आपातकालीन प्रबंधन को मजबूत करना होगा। स्वास्थ्य विभाग को भी एक मजबूत निगरानी तंत्र स्थापित करना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि संसाधनों की कमी का बहाना बनाकर कोई भी गंभीर मरीज उपचार से वंचित न रहे।