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देवरिया: टीबी मरीजों को पोषण पोटली का सहारा, सीएमएस ने की अनूठी पहल

देवरिया जिले में क्षय रोग (टीबी) से जूझ रहे मरीजों के लिए एक सराहनीय पहल की गई है। जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) ने स्वयं टीबी मरीजों को 'पोषण पोटली' सौंपकर उनके शीघ्र स्वस्थ होने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। यह कदम मरीजों को उपचार के साथ-साथ आवश्यक पोषण प्रदान करने पर केंद्रित है।

मुख्य पॉइंट
  • देवरिया जिला अस्पताल में सीएमएस द्वारा टीबी मरीजों को पोषण पोटली वितरित की गई।
  • इस पहल का उद्देश्य क्षय रोग से पीड़ित मरीजों को अतिरिक्त पोषण सहायता प्रदान करना है।
  • पोषण पोटली में आवश्यक खाद्य सामग्री और सप्लीमेंट्स शामिल हैं, जो उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाएंगे।
  • यह कदम भारत सरकार के टीबी उन्मूलन कार्यक्रम, विशेषकर निक्षय पोषण योजना के अनुरूप है।
  • सीएमएस ने मरीजों को नियमित दवा लेने और पौष्टिक आहार का सेवन करने की सलाह दी।
देवरिया: टीबी मरीजों को पोषण पोटली का सहारा, सीएमएस ने की अनूठी पहल

क्षय रोग के उपचार में दवाओं के साथ-साथ संतुलित और पौष्टिक आहार का विशेष महत्व है। कुपोषण टीबी के मरीजों की स्थिति को और गंभीर बना सकता है, जिससे उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ती है और उपचार का असर कम होता है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए, देवरिया जिला अस्पताल में यह पहल की गई है। भारत सरकार ने वर्ष 2025 तक देश से टीबी को जड़ से खत्म करने का लक्ष्य रखा है, जिसके तहत 'निक्षय पोषण योजना' जैसी कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। यह पोषण पोटली इसी दिशा में एक स्थानीय और प्रभावी प्रयास है।

इस 'पोषण पोटली' वितरण का सीधा असर टीबी मरीजों के स्वास्थ्य पर पड़ेगा। बेहतर पोषण से न केवल उनकी शारीरिक शक्ति बढ़ेगी, बल्कि उपचार के प्रति उनकी प्रतिबद्धता भी मजबूत होगी, जिससे दवा छोड़ने की दर में कमी आएगी। यह पहल समुदाय में टीबी के प्रति जागरूकता बढ़ाने और मरीजों के प्रति सहानुभूति दर्शाने में भी सहायक सिद्ध होगी। सीएमएस ने इस दौरान सभी मरीजों को धैर्य रखने और इलाज पूरा करने की सलाह दी, साथ ही बताया कि ऐसे प्रयास भविष्य में भी जारी रहेंगे ताकि कोई भी मरीज पोषण की कमी के कारण कमजोर न पड़े। यह स्थानीय स्तर पर टीबी उन्मूलन के लक्ष्य को प्राप्त करने में मील का पत्थर साबित हो सकता है।

Summary
देवरिया में सीएमएस की यह पहल टीबी मरीजों के उपचार और पोषण को एकीकृत करने का एक सफल उदाहरण है। यह न केवल मरीजों को शारीरिक शक्ति प्रदान करेगी, बल्कि टीबी मुक्त भारत के सपने को साकार करने में भी महत्वपूर्ण योगदान देगी।
स्रोत: सार्वजनिक रूप से उपलब्ध समाचार स्रोत
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