लखनऊ में नगर निगम ने राजस्व वसूली को लेकर एक कड़ा रुख अपनाया है। गृहकर बकाया न चुकाने पर जल निगम का बैंक खाता सीज कर दिया गया है, जिससे सरकारी विभागों के बीच वित्तीय अनुशासन पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
- लखनऊ नगर निगम ने जल निगम का बैंक खाता सीज किया।
- यह कार्रवाई करोड़ों रुपये के गृहकर बकाया के कारण की गई।
- जल निगम को बकाया भुगतान के लिए कई नोटिस दिए गए थे।
- इस कदम से सरकारी विभागों के बीच वित्तीय जवाबदेही पर जोर दिया गया।
- नगर निगम ने राजस्व वसूली में अपनी सख्ती का स्पष्ट संदेश दिया है।
लखनऊ नगर निगम ने लंबे समय से लंबित गृहकर बकाया की वसूली के लिए एक बड़ा अभियान छेड़ रखा है। इसी क्रम में, लखनऊ जल निगम पर उसकी विभिन्न संपत्तियों का करोड़ों रुपये का गृहकर बकाया था। नगर निगम ने जल निगम को इस बकाया राशि के भुगतान के लिए कई बार नोटिस जारी किए और अंतिम चेतावनी भी दी, लेकिन भुगतान नहीं किया गया। अंततः, नगर निगम को सख्त कदम उठाते हुए जल निगम के बैंक खाते को सीज करने का आदेश जारी करना पड़ा। यह कार्रवाई निगम के इस संकल्प को दर्शाती है कि राजस्व वसूली में किसी भी संस्थान को बख्शा नहीं जाएगा, भले ही वह सरकारी ही क्यों न हो।
जल निगम का बैंक खाता सीज होने से उसकी दैनिक वित्तीय गतिविधियों पर सीधा और तत्काल प्रभाव पड़ेगा। इससे कर्मचारियों के वेतन भुगतान, ठेकेदारों को भुगतान और अन्य आवश्यक व्ययों में गंभीर बाधा आ सकती है। यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो यह शहर में जल आपूर्ति और स्वच्छता जैसी महत्वपूर्ण सेवाओं के संचालन को भी अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित कर सकती है। यह घटना अन्य सरकारी विभागों के लिए भी एक स्पष्ट चेतावनी है कि उन्हें अपने वित्तीय दायित्वों को गंभीरता से लेना होगा। अब जल निगम पर जल्द से जल्द बकाया चुकाने का भारी दबाव है ताकि उसके खाते बहाल हो सकें और सामान्य कामकाज फिर से शुरू हो सके।