लखनऊ ने आज एक ऐसे सपूत को खो दिया, जिसने अपना पूरा जीवन दूसरों की सेवा में समर्पित कर दिया। डॉ. रामप्रकाश शर्मा की अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब उनकी लोकप्रियता और निस्वार्थ सेवा का प्रमाण था, जिसने हर आंख को नम कर दिया।
- डॉ. रामप्रकाश शर्मा का 85 वर्ष की आयु में निधन।
- उनकी अंतिम यात्रा में हज़ारों की संख्या में लोग शामिल हुए।
- मुख्यमंत्री समेत कई गणमान्य व्यक्तियों ने दी श्रद्धांजलि।
- दशकों तक समाज के वंचित वर्ग के लिए किया अथक कार्य।
- उनके पार्थिव शरीर को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।
डॉ. रामप्रकाश शर्मा, जिन्हें प्यार से 'बाबूजी' कहा जाता था, लखनऊ की पहचान बन चुके थे। पिछले पांच दशकों से उन्होंने शहर के गरीब और वंचित तबके के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं को सुनिश्चित करने में अपना जीवन खपा दिया। उनकी छोटी सी क्लीनिक और निशुल्क पाठशाला अनगिनत लोगों के लिए आशा का केंद्र थी। उनका निधन सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि एक युग का अंत था, जिसकी गूंज पूरे शहर में महसूस की गई।
उनकी अंतिम यात्रा में शामिल हर व्यक्ति की आंखें नम थीं, लेकिन चेहरे पर उनके प्रति गहरा सम्मान भी झलक रहा था। मुख्यमंत्री ने उन्हें 'प्रेरणा का पुंज' बताया, वहीं स्थानीय निवासियों ने उन्हें 'देवदूत' की संज्ञा दी। डॉ. शर्मा के कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए कई स्वयंसेवी संगठनों ने संकल्प लिया है। उम्मीद है कि उनकी विरासत नई पीढ़ी को समाज सेवा के लिए प्रेरित करती रहेगी और लखनऊ में उनके नाम पर एक बड़ा कल्याणकारी केंद्र स्थापित किया जाएगा।