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नया साल और गीता: आज से बेहतर कल की शुरुआत

नया साल, टूटा मन और गीता की सबसे सच्ची सीख


12 बजते हैं।

मोबाइल की स्क्रीन चमक उठती है।
“Happy New Year”
“नया साल, नई शुरुआत”

सब हँस रहे हैं…
पर बहुत से लोग ऐसे भी हैं,
जो मोबाइल हाथ में लेकर चुपचाप बैठे हैं।

उनके चेहरे पर मुस्कान नहीं,
आँखों में सवाल हैं।

“पिछला साल भी तो ऐसा ही शुरू हुआ था… फिर क्या बदला?”

नया साल सबके लिए खुशियों वाला नहीं होता

कुछ लोग नया साल मनाते हैं,
कुछ लोग नया साल सहते हैं

कोई नौकरी खो चुका होता है।
कोई एग्ज़ाम में फिर से फेल हुआ होता है।
कोई रिश्ते टूटने का दर्द लेकर बैठा होता है।
और कोई… बस अंदर से थक चुका होता है।

बाहर से सब ठीक लगता है,
पर अंदर एक आवाज़ होती है —
“अब और कितना?”

ठीक ऐसे ही अर्जुन भी खड़ा था

भगवद गीता में अर्जुन भी एक ऐसे ही मोड़ पर खड़ा था।

उसके सामने भविष्य था —
डरावना, अनजान।

पीछे था बीता हुआ कल —
अपने लोग, अपने रिश्ते, अपनी यादें।

धनुष उसके हाथ में था,
पर हाथ काँप रहे थे।

अर्जुन रो नहीं रहा था,
लेकिन अंदर से टूट चुका था।

उसने कृष्ण से कहा —
“मैं आगे क्या करूँ… समझ नहीं आ रहा।”

आज का इंसान भी तो यही कह रहा है।

नया साल सवाल लेकर आता है, जवाब नहीं

हम सोचते हैं:

  • इस साल सब ठीक हो जाएगा
  • इस साल दर्द नहीं होगा
  • इस साल मैं हारूँगा नहीं

पर सच ये है कि:

  • ज़िंदगी calendar देखकर नहीं चलती
  • तकलीफ तारीख देखकर नहीं आती

नया साल कोई जादू नहीं है।

लेकिन…

नया साल रुककर सोचने का मौका ज़रूर देता है।

कृष्ण ने अर्जुन को क्या दिया?

कृष्ण ने अर्जुन को:

  • कोई shortcut नहीं दिया
  • कोई guarantee नहीं दी
  • कोई वादा नहीं किया कि सब आसान होगा

उन्होंने बस एक बात कही —

“कर्म करो, फल की चिंता मत करो।”

मतलब:
जो हो गया, उसे पकड़कर मत बैठो।
जो होगा, उससे डरकर मत जियो।
जो सामने है, उसे ईमानदारी से करो।

नए साल में गीता हमें क्या सिखाती है?

बीते साल को कंधे पर ढोना बंद करो

पिछले साल की गलती,
पिछले साल की हार,
पिछले साल का पछतावा —

ये सब अगर साथ लेकर चलोगे,
तो नया साल भी भारी लगेगा।

गीता कहती है —
छोड़ना भी सीखो।

खुद को कोसना बंद करो

हम अपने साथ सबसे ज़्यादा सख़्त होते हैं।

“मैं ही नाकाम हूँ।”
“मुझसे कुछ नहीं होगा।”

गीता कहती है —
तुम नाकाम नहीं हो,
तुम सीख रहे हो।

आज को ठीक से जी लो

पूरा साल सुधारने की ज़रूरत नहीं है।
बस आज को ईमानदारी से जी लो।

आज:

  • मेहनत कर लो
  • सच बोल लो
  • खुद से झूठ मत बोलो

यही नया साल है।

नया साल बाहर नहीं, अंदर से शुरू होता है

नया साल:

  • नए कपड़े पहनने से नहीं
  • नए स्टेटस लगाने से नहीं
  • नए promises लिखने से नहीं

नया साल शुरू होता है:
जब इंसान खुद से कहता है —
“मैं कोशिश छोड़ूँगा नहीं।”

अगर तुम्हारा मन भारी है…

अगर आज:

  • तुम्हें डर लग रहा है
  • भविष्य साफ़ नहीं दिख रहा
  • मन थक चुका है

तो जान लो —
तुम गलत नहीं हो।

तुम अर्जुन की तरह एक मोड़ पर खड़े हो।

और हर अर्जुन को एक दिन
अपना कृष्ण मिल ही जाता है —
कभी किसी किताब में,
कभी किसी सोच में,
कभी खुद के अंदर।

गीता का नया साल संदेश

नया साल परफेक्ट होने का नाम नहीं है।
नया साल गिरकर भी उठने का हौसला है।

असली सीख (जो दिल में रहे)

नया साल बदलने का नहीं,
खुद को समझने का मौका है।
और यही सबसे बड़ी शुरुआत है।


यह लेख भगवद गीता की शिक्षाओं से प्रेरित है और नए वर्ष के संदर्भ में मानवीय भावनाओं व जीवन संघर्षों से जोड़कर लिखा गया है।

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