गोरखपुर के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ने स्वास्थ्य शिक्षा के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। संस्थान ने पीरियोडोंटोलॉजी में मास्टर ऑफ डेंटल सर्जरी (एमडीएस) पाठ्यक्रम शुरू करने की घोषणा की है, जिससे उत्तर प्रदेश के पूर्वी क्षेत्र में दंत चिकित्सा शिक्षा को नई ऊँचाई मिलेगी।
- एम्स गोरखपुर में पीरियोडोंटोलॉजी में एमडीएस पाठ्यक्रम शुरू होगा।
- यह विशेष पाठ्यक्रम दांतों और मसूड़ों से संबंधित बीमारियों के उन्नत उपचार पर केंद्रित होगा।
- पाठ्यक्रम से क्षेत्र में विशेषज्ञ दंत चिकित्सकों की कमी पूरी करने में मदद मिलेगी।
- एम्स गोरखपुर स्वास्थ्य शिक्षा और अनुसंधान के केंद्र के रूप में अपनी स्थिति मजबूत करेगा।
- छात्रों को अत्याधुनिक सुविधाओं और अनुभवी संकाय के मार्गदर्शन में सीखने का अवसर मिलेगा।
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, गोरखपुर, लगातार अपनी सुविधाओं और शैक्षणिक कार्यक्रमों का विस्तार कर रहा है। इसी कड़ी में, अब संस्थान ने पीरियोडोंटोलॉजी में एमडीएस पाठ्यक्रम शुरू करने का निर्णय लिया है। पीरियोडोंटोलॉजी दंत चिकित्सा की वह शाखा है जो दांतों को सहारा देने वाले ऊतकों, जैसे मसूड़ों और हड्डी, के रोगों के निदान, उपचार और रोकथाम से संबंधित है। यह कदम क्षेत्र में विशेषज्ञ दंत चिकित्सकों की बढ़ती आवश्यकता को पूरा करने और उच्च स्तरीय दंत चिकित्सा शिक्षा प्रदान करने के एम्स के लक्ष्य का हिस्सा है।
इस नए एमडीएस पाठ्यक्रम की शुरुआत से पूर्वांचल और पड़ोसी राज्यों के छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा। यह एम्स गोरखपुर को न केवल एक चिकित्सा संस्थान बल्कि एक प्रमुख शैक्षिक केंद्र के रूप में भी स्थापित करेगा। मरीजों को भी अब मसूड़ों और दांतों से संबंधित गंभीर बीमारियों के लिए बेहतर और विशेषज्ञ उपचार स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होगा। यह पहल क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार लाएगी और दंत चिकित्सा अनुसंधान को भी बढ़ावा देगी, जिससे भविष्य में नए उपचार पद्धतियों का विकास हो सकेगा।