हाल ही में 'दोस्त पुलिस' पहल के तहत एक महिला दरोगा ने छात्राओं को सशक्त बनाने और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। इस सत्र में छात्राओं को न केवल आपातकालीन हेल्पलाइन नंबरों से अवगत कराया गया, बल्कि उन्हें अपनी सुरक्षा के प्रति जागरूक रहने के व्यावहारिक तरीके भी सिखाए गए।
- 'दोस्त पुलिस' कार्यक्रम के तहत महिला दरोगा ने छात्राओं को संबोधित किया।
- छात्राओं को विभिन्न आपातकालीन हेल्पलाइन नंबरों की विस्तृत जानकारी दी गई।
- आत्मरक्षा, साइबर सुरक्षा और कानूनी अधिकारों पर भी मार्गदर्शन प्रदान किया गया।
- महिला दरोगा ने मित्रवत माहौल में छात्राओं के सवालों के जवाब दिए।
- इस पहल का उद्देश्य पुलिस और छात्राओं के बीच विश्वास का पुल बनाना था।
वर्तमान समय में महिला सुरक्षा एक गंभीर चिंता का विषय है, खासकर युवा छात्राओं के लिए। ऐसे में पुलिस और समुदाय के बीच विश्वास का माहौल बनाना अत्यंत आवश्यक हो जाता है। 'दोस्त पुलिस' जैसी पहल इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसका उद्देश्य पुलिस को जनता के करीब लाना और उन्हें सुरक्षा संबंधी जानकारी प्रदान करना है। यह कार्यक्रम विशेष रूप से छात्राओं को आत्मनिर्भर बनाने और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए तैयार करने पर केंद्रित था।
इस तरह के जागरूकता सत्र छात्राओं में आत्मविश्वास पैदा करते हैं और उन्हें यह समझने में मदद करते हैं कि संकट के समय उन्हें कहां और कैसे मदद मिल सकती है। इससे न केवल अपराधों की रोकथाम में सहायता मिलती है, बल्कि छात्राओं में पुलिस के प्रति भय भी कम होता है, जिससे वे अपनी समस्याओं को खुलकर साझा कर पाती हैं। भविष्य में ऐसी पहल को और अधिक स्कूलों और कॉलेजों तक पहुंचाने की आवश्यकता है ताकि हर छात्रा अपनी सुरक्षा के प्रति जागरूक और सशक्त महसूस कर सके। यह सामुदायिक पुलिसिंग का एक उत्कृष्ट उदाहरण है जो समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकता है।