कुशीनगर जिले के एक गांव में आयोजित चौपाल ग्रामीणों की समस्याओं के समाधान की उम्मीद लेकर आई थी, लेकिन उपजिलाधिकारी (एसडीएम) के न पहुंचने से यह आशा निराशा में बदल गई। ग्रामीणों को बिना अपनी बात रखे ही लौटना पड़ा, जिससे स्थानीय प्रशासन के प्रति असंतोष देखा जा रहा है।
- कुशीनगर के रामकोला गांव में जनसुनवाई के लिए चौपाल का आयोजन किया गया था।
- उपजिलाधिकारी (एसडीएम) को चौपाल में उपस्थित होना था, लेकिन वे नहीं पहुंचे।
- ग्रामीण अपनी शिकायतें और समस्याएं लेकर बड़ी संख्या में एकत्रित हुए थे।
- एसडीएम की अनुपस्थिति के कारण चौपाल बेनतीजा रही और ग्रामीणों को निराश लौटना पड़ा।
- यह घटना स्थानीय प्रशासन और जनता के बीच संवादहीनता को उजागर करती है।
यह घटना कुशीनगर जनपद के रामकोला गांव की है, जहां स्थानीय प्रशासन द्वारा ग्रामीणों की समस्याओं को सीधे सुनने और मौके पर समाधान प्रदान करने के उद्देश्य से एक चौपाल का आयोजन किया गया था। इस चौपाल में उपजिलाधिकारी (एसडीएम) की उपस्थिति अपेक्षित थी, ताकि भूमि विवाद, राशन वितरण, पेंशन संबंधी मुद्दे और अन्य सरकारी योजनाओं से जुड़ी शिकायतों का निवारण हो सके। ग्रामीणों को सूचना दी गई थी कि एसडीएम स्वयं उपस्थित होकर उनकी समस्याओं को सुनेंगे, जिसके चलते बड़ी संख्या में लोग अपनी अर्जियां और उम्मीदें लेकर निर्धारित समय पर चौपाल स्थल पर पहुंचे थे।
एसडीएम के निर्धारित समय पर न पहुंचने और फिर अंततः अनुपस्थित रहने की खबर से ग्रामीणों में गहरा असंतोष फैल गया। दूर-दराज से आए बुजुर्गों, महिलाओं और किसानों को घंटों इंतजार के बाद निराश होकर लौटना पड़ा। इस घटना ने न केवल ग्रामीणों के समय और ऊर्जा को बर्बाद किया, बल्कि स्थानीय प्रशासन के प्रति उनके विश्वास को भी ठेस पहुंचाई है। ऐसे आयोजनों का विफल होना जनता और सरकार के बीच भरोसे की खाई को और चौड़ा कर सकता है। प्रशासन को इस मामले पर संज्ञान लेते हुए भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए, ताकि जनसुनवाई कार्यक्रमों का मूल उद्देश्य बरकरार रह सके।