देश के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ने मरीजों और उनके तीमारदारों के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की है। अब दूरदराज से आने वाले हजारों लोगों को ठंड के मौसम में किफायती और सुरक्षित आवास की सुविधा मिल सकेगी।
- एम्स के विश्राम सदनों में मरीज और उनके परिजन ठहर सकेंगे।
- विशेष रूप से ठंड से बचाव के लिए यह व्यवस्था की गई है।
- सभी विश्राम सदनों में कुल 1500 बिस्तरों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है।
- यह सुविधा उन लोगों के लिए वरदान साबित होगी जो इलाज के लिए लंबी दूरी तय कर आते हैं।
- सुरक्षित और किफायती आवास से मरीजों के इलाज में भी आसानी होगी।
अक्सर देखा जाता है कि एम्स जैसे बड़े अस्पतालों में इलाज के लिए देश के कोने-कोने से मरीज आते हैं। इनमें से कई गरीब और ग्रामीण पृष्ठभूमि के होते हैं, जिनके लिए दिल्ली जैसे महंगे शहर में ठहरने की व्यवस्था करना बड़ी चुनौती होती है। विशेषकर सर्दियों के महीनों में, जब तापमान काफी गिर जाता है, मरीजों के परिजनों को अस्पताल के बाहर या खुले में रात गुजारने पर मजबूर होना पड़ता है, जिससे उनके स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ता है। एम्स प्रशासन की यह पहल इसी समस्या का समाधान करने और मानवीय दृष्टिकोण से सहायता प्रदान करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
इस व्यवस्था से न केवल मरीजों और उनके तीमारदारों को ठंड और अन्य मौसमी बीमारियों से बचाव मिलेगा, बल्कि उन्हें इलाज के दौरान एक मानसिक शांति और सुरक्षा का एहसास भी होगा। परिजनों के पास रहने से मरीजों की देखभाल भी बेहतर तरीके से हो पाएगी। यह पहल दिल्ली में बेघर या अस्थायी आवास की तलाश में भटकने वाले लोगों की संख्या को कम करने में भी सहायक होगी। भविष्य में, यह मॉडल देश के अन्य बड़े चिकित्सा संस्थानों के लिए भी एक प्रेरणा का स्रोत बन सकता है, जिससे पूरे भारत में मरीजों और उनके परिवारों को बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी।