लखनऊ के लोकबंधु राजनारायण अस्पताल से सामने आई एक हृदय विदारक घटना ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अस्पताल की इमरजेंसी में बिजली गुल होने के बाद मरीजों का इलाज मोबाइल टॉर्च की रोशनी में किया गया, जिसने सरकारी अस्पतालों की बदहाली की पोल खोल दी है।
- लखनऊ के लोकबंधु राजनारायण अस्पताल की इमरजेंसी में हुई यह घटना।
- बिजली गुल होने के कारण डॉक्टरों ने मोबाइल टार्च की रोशनी में मरीजों का उपचार किया।
- घटना के दौरान कई गंभीर मरीज भी इमरजेंसी वार्ड में मौजूद थे।
- अस्पताल में वैकल्पिक बिजली व्यवस्था (जेनरेटर/इन्वर्टर) का कोई इंतज़ाम नहीं दिखा।
- इस घटना ने सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा पर प्रश्नचिह्न लगाए हैं।
यह चौंकाने वाली घटना तब सामने आई जब देर रात लोकबंधु अस्पताल की इमरजेंसी में अचानक बिजली गुल हो गई और बैकअप सिस्टम भी काम नहीं कर रहा था। ऐसे बड़े सरकारी अस्पतालों में जेनरेटर या इन्वर्टर जैसी वैकल्पिक बिजली व्यवस्था का होना अनिवार्य है, लेकिन यहां ऐसा कुछ भी प्रभावी रूप से काम करता नहीं दिखा। डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ को मजबूरन अपने मोबाइल की टार्च या उपलब्ध अन्य टार्च की रोशनी में ही मरीजों को देखना पड़ा और प्राथमिक उपचार देना पड़ा। इस दौरान कई ऐसे मरीज भी थे जिनकी हालत गंभीर थी और उन्हें तत्काल चिकित्सा सहायता की आवश्यकता थी, जिससे उनकी जान को खतरा उत्पन्न हो सकता था।
इस घटना ने न केवल मरीजों और उनके परिजनों को भयभीत किया है, बल्कि पूरे शहर में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से इस लापरवाही पर जवाबदेही तय करने की मांग की है। ऐसी स्थिति में मरीजों की सुरक्षा और उनके इलाज की गुणवत्ता पर गंभीर खतरा मंडराता है। उम्मीद है कि स्वास्थ्य विभाग इस मामले को गंभीरता से लेगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाएगा, जिसमें अस्पतालों में पर्याप्त और विश्वसनीय बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना शामिल है। अन्यथा, जनता का विश्वास सरकारी स्वास्थ्य प्रणाली से उठ जाएगा और इसका खामियाजा गंभीर मरीजों को भुगतना पड़ेगा।