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महाराजगंज: चिउटहां में मौत का झूला बने हाईटेंशन तार, प्रशासन की चुप्पी पर सवाल

महाराजगंज जिले के चिउटहां गांव में पिछले छह महीनों से हाईटेंशन बिजली के तार खतरनाक तरीके से लटक रहे हैं, जिससे ग्रामीण लगातार भय के साये में जी रहे हैं। स्थानीय निवासियों की बार-बार शिकायत के बावजूद, बिजली विभाग और प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे एक बड़े हादसे का खतरा मंडरा रहा है।

मुख्य पॉइंट
  • महाराजगंज के चिउटहां गांव में छह महीने से लटक रहे हैं हाईटेंशन तार।
  • ये तार जमीन से बेहद कम ऊंचाई पर झूल रहे हैं, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी हुई है।
  • स्थानीय ग्रामीणों ने बिजली विभाग से कई बार शिकायतें की हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
  • बच्चों और पशुओं के लिए यह स्थिति विशेष रूप से खतरनाक है।
  • प्रशासन और बिजली विभाग की लापरवाही पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
महाराजगंज: चिउटहां में मौत का झूला बने हाईटेंशन तार, प्रशासन की चुप्पी पर सवाल

यह मामला महाराजगंज जिले के चिउटहां गांव का है, जहां आबादी वाले क्षेत्र से गुजरने वाले हाईटेंशन बिजली के तार पिछले लगभग छह महीनों से जर्जर अवस्था में झूल रहे हैं। इन तारों की ऊंचाई इतनी कम हो गई है कि वे राहगीरों, बच्चों और कृषि कार्यों में लगे लोगों के लिए सीधा खतरा बन गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने कई बार बिजली विभाग के अधिकारियों और स्थानीय प्रशासन को लिखित व मौखिक शिकायतें दी हैं, लेकिन हर बार उन्हें केवल आश्वासन ही मिला है। इस गंभीर समस्या को लेकर विभाग की निष्क्रियता ने ग्रामीणों में भारी रोष पैदा कर दिया है।

लटकते हुए हाईटेंशन तार किसी भी समय एक बड़ी त्रासदी का कारण बन सकते हैं। बारिश के मौसम में या हवा चलने पर इन तारों के टूटने अथवा आपस में टकराने से आग लगने, बिजली का झटका लगने या जानलेवा दुर्घटना होने का अंदेशा बना हुआ है। खेतों में काम कर रहे किसान, स्कूल जाते बच्चे और चारा चरने वाले पशु सबसे अधिक जोखिम में हैं। इस लापरवाही का खामियाजा कभी भी किसी मासूम को भुगतना पड़ सकता है। प्रशासन और बिजली विभाग को चाहिए कि वे किसी बड़े हादसे का इंतजार किए बिना तत्काल इन तारों को ठीक करवाएं और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए उचित कदम उठाएं।

Summary
चिउटहां में छह माह से लटकते हाईटेंशन तार एक गंभीर खतरा बने हुए हैं, जिस पर बिजली विभाग और प्रशासन की चुप्पी चिंताजनक है। तत्काल कार्रवाई न होने पर किसी भी समय एक बड़ा हादसा हो सकता है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों की होगी।
स्रोत: सार्वजनिक रूप से उपलब्ध समाचार स्रोत
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