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कुशीनगर में गहराया सिंचाई संकट: सूखते माइनरों से किसान बेहाल, फसलों पर खतरा

कुशीनगर जिले के किसानों को इन दिनों भीषण सिंचाई संकट का सामना करना पड़ रहा है। नहरों से निकलने वाले माइनरों तक पानी न पहुंचने से उनकी फसलें सूखने की कगार पर हैं, जिससे उनकी आजीविका पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।

मुख्य पॉइंट
  • कुशीनगर के कई ब्लॉकों में माइनर नहरों में पानी नहीं पहुंच रहा।
  • धान और गन्ने की फसलों को सबसे अधिक नुकसान की आशंका।
  • किसान सिंचाई के लिए महंगे पंप सेटों पर निर्भर होने को मजबूर।
  • स्थानीय किसानों में सिंचाई विभाग के प्रति गहरा आक्रोश व्याप्त।
  • हजारों एकड़ कृषि भूमि पर पानी की कमी से उत्पादन प्रभावित होने की चिंता।
कुशीनगर में गहराया सिंचाई संकट: सूखते माइनरों से किसान बेहाल, फसलों पर खतरा

दरअसल, कुशीनगर का कृषि क्षेत्र मुख्य रूप से नहरों पर आधारित है, जिनमें गंडक नहर प्रणाली प्रमुख है। इस प्रणाली की मुख्य नहरों में तो किसी तरह पानी दिख रहा है, लेकिन उनसे निकलने वाले छोटे माइनरों और रजबाहों तक पानी की एक बूंद भी नहीं पहुंच रही है। यह समस्या जिले के पडरौना, खड्डा, नेबुआ नौरंगिया, फाजिलनगर और हाटा जैसे कई ब्लॉकों में विकराल रूप ले चुकी है। किसानों का कहना है कि हर साल मानसून से पहले और बाद में ऐसी स्थिति उत्पन्न होती है, जब सिंचाई विभाग की लापरवाही के चलते नहरों की सफाई और पानी की उचित व्यवस्था नहीं हो पाती।

इस गंभीर सिंचाई संकट का सीधा असर किसानों की मेहनत और उनकी आर्थिक स्थिति पर पड़ रहा है। धान की रोपाई के लिए तैयार खेत सूखे पड़े हैं, वहीं जो फसलें बोई जा चुकी हैं, वे पानी के अभाव में पीली पड़ने लगी हैं। गन्ने की फसलें भी सूखने की कगार पर हैं, जिससे किसानों की साल भर की मेहनत बर्बाद होने का डर सता रहा है। मजबूरन किसान डीजल पंप सेटों के महंगे खर्च पर निर्भर हैं, जो उनकी लागत को कई गुना बढ़ा रहा है। यदि यह स्थिति जल्द नहीं सुधरी, तो जिले में खाद्य सुरक्षा और किसानों की आय पर नकारात्मक प्रभाव पड़ना तय है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी बड़ा झटका लग सकता है।

Summary
कुशीनगर में माइनरों तक पानी न पहुंचने से उत्पन्न सिंचाई संकट ने किसानों के समक्ष एक गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है, जिससे उनकी फसलें और आजीविका खतरे में है। प्रशासन को इस समस्या पर तत्काल ध्यान देते हुए प्रभावी समाधान सुनिश्चित करना होगा ताकि हजारों किसानों को राहत मिल सके।
स्रोत: सार्वजनिक रूप से उपलब्ध समाचार स्रोत
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