देशभर में स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ मानी जाने वाली आशा कार्यकर्ताओं ने अपनी लंबित मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। हजारों की संख्या में कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर उतरकर सरकार का ध्यान अपनी ओर खींचा और बेहतर भविष्य की मांग की।
- आशा कार्यकर्ताओं ने कम मानदेय और कार्यभार की शिकायत की।
- उन्हें स्थायी कर्मचारी का दर्जा देने की प्रमुख मांग उठाई गई।
- सामाजिक सुरक्षा, पेंशन और स्वास्थ्य बीमा की भी अपील की गई।
- कई राज्यों में एक साथ प्रदर्शन कर सरकार पर दबाव बनाया गया।
- प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों पर तत्काल कार्रवाई की मांग की।
ग्रामीण और शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं में आशा कार्यकर्ताओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। वे टीकाकरण, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, परिवार नियोजन और विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रमों को जमीनी स्तर पर सफल बनाने में अहम कड़ी हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान भी उन्होंने जान जोखिम में डालकर अपनी सेवाएं दीं। हालांकि, इस महत्वपूर्ण योगदान के बावजूद, उन्हें आज भी महज एक मानदेय पर काम करना पड़ता है, जो अक्सर उनके काम के अनुपात में बहुत कम होता है। लंबे समय से चली आ रही यह उपेक्षा ही इस राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन का मुख्य कारण है।
आशा कार्यकर्ताओं के इस प्रदर्शन का सीधा असर प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ सकता है, खासकर दूरदराज के ग्रामीण इलाकों में। यदि सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं करती है, तो भविष्य में स्वास्थ्य कार्यक्रमों का क्रियान्वयन बाधित हो सकता है। यह प्रदर्शन सरकार पर दबाव बनाता है कि वह स्वास्थ्य क्षेत्र के इन अदृश्य योद्धाओं की स्थिति में सुधार करे। सरकार को न केवल उनके मानदेय में वृद्धि करनी होगी, बल्कि उन्हें उचित सामाजिक सुरक्षा और स्थायीकरण का मार्ग भी प्रशस्त करना होगा, ताकि स्वास्थ्य सेवा प्रणाली की नींव मजबूत बनी रहे।