देवरिया जिले में बिजली उपभोक्ताओं की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही है। गलत बिलों को ठीक कराने के लिए उन्हें बिजली विभाग के कार्यालयों के बार-बार चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, जिससे उनका समय और पैसा दोनों बर्बाद हो रहा है।
- हजारों उपभोक्ता गलत बिजली बिलों से जूझ रहे हैं, जिनमें अत्यधिक राशि या गलत रीडिंग शामिल है।
- बिल सुधार के लिए ऑनलाइन पोर्टल और हेल्पलाइन अक्सर अप्रभावी साबित हो रहे हैं।
- ग्रामीण क्षेत्रों के उपभोक्ताओं को लंबी दूरी तय कर शहर के कार्यालयों तक पहुंचना पड़ता है।
- कर्मचारी और अधिकारियों द्वारा शिकायतों को गंभीरता से न लेने के आरोप लग रहे हैं।
- बार-बार चक्कर लगाने के बावजूद कई बिल अभी भी ठीक नहीं हुए हैं।
यह समस्या कोई नई नहीं है, बल्कि पिछले कुछ महीनों से देवरिया के विभिन्न क्षेत्रों में लगातार बढ़ रही है। उपभोक्ताओं का कहना है कि उन्हें कभी हजारों रुपये के गलत बिल थमा दिए जाते हैं, तो कभी उनके मीटर की रीडिंग गलत दर्ज कर दी जाती है। कई बार तो ऐसे बिल भी आ रहे हैं जो मीटर रीडिंग से कहीं अधिक होते हैं। विभाग द्वारा लागू किए गए नए बिलिंग सॉफ्टवेयर या मीटर रीडिंग प्रक्रिया में हुई गड़बड़ी को इसका मुख्य कारण माना जा रहा है। इन त्रुटियों के कारण आम जनता को भारी मानसिक और आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
इस समस्या का सीधा असर आम लोगों की दैनिक दिनचर्या और कमाई पर पड़ रहा है। दिहाड़ी मजदूर और छोटे दुकानदार अपनी मजदूरी छोड़कर बिल सुधरवाने के लिए विभाग के चक्कर काट रहे हैं, जिससे उनका एक दिन का काम ठप हो जाता है। बुजुर्ग और महिलाएं भी इस दौड़-भाग से खासी परेशान हैं। यदि समय पर बिल ठीक नहीं होता तो उन्हें बिजली कनेक्शन कटने का डर सताता रहता है, जबकि वे सही बिल का भुगतान करने को तैयार हैं। यह स्थिति प्रशासन और बिजली विभाग के प्रति जनता में अविश्वास पैदा कर रही है, और तत्काल समाधान की मांग उठ रही है।