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UP में गिग वर्कर्स को मिलेगा न्याय: कंपनियों पर शिकंजा, नए नियमों से मिलेगी सुरक्षा

उत्तर प्रदेश में गिग वर्कर्स के शोषण का बड़ा खुलासा हुआ है। राज्य के लाखों गिग श्रमिकों में से केवल एक छोटा हिस्सा ही पंजीकृत है, जिसके बाद अब सरकार ने कंपनियों पर नकेल कसने और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए नए नियम लागू करने का फैसला किया है।

मुख्य पॉइंट
  • उत्तर प्रदेश में लगभग 15 लाख गिग वर्कर कार्यरत हैं।
  • इनमें से केवल 10% (लगभग 1.5 लाख) ही आधिकारिक तौर पर पंजीकृत हैं।
  • यह स्थिति गिग कंपनियों द्वारा बड़े पैमाने पर शोषण की ओर इशारा करती है।
  • राज्य सरकार अब गिग वर्करों के पंजीकरण और कल्याण के लिए नए नियम बनाएगी।
  • नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों पर कड़ा शिकंजा कसा जाएगा।
UP में गिग वर्कर्स को मिलेगा न्याय: कंपनियों पर शिकंजा, नए नियमों से मिलेगी सुरक्षा

उत्तर प्रदेश, देश के सबसे बड़े राज्यों में से एक होने के नाते, गिग अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन गया है। फूड डिलीवरी, राइड-शेयरिंग और ई-कॉमर्स जैसी सेवाओं में लाखों युवा अपनी आजीविका कमा रहे हैं। हालांकि, हालिया खुलासे ने इन श्रमिकों की असुरक्षित स्थिति को सामने ला दिया है। बिना पंजीकरण के काम करने वाले ये श्रमिक सामाजिक सुरक्षा, न्यूनतम मजदूरी और अन्य बुनियादी अधिकारों से वंचित रहते हैं, जिससे उनका लगातार शोषण होता रहता है। यह स्थिति श्रम कानूनों की अनदेखी का एक बड़ा उदाहरण है।

इस नए कदम से गिग वर्करों के जीवन में महत्वपूर्ण बदलाव आने की उम्मीद है। नए नियमों के तहत, गिग कंपनियों को अपने सभी श्रमिकों को अनिवार्य रूप से पंजीकृत करना होगा और उन्हें न्यूनतम सामाजिक सुरक्षा लाभ प्रदान करने होंगे। इसका सीधा असर कंपनियों के परिचालन लागत पर पड़ेगा, लेकिन यह श्रमिकों के लिए एक सुरक्षित और सम्मानजनक कार्य वातावरण सुनिश्चित करेगा। आने वाले समय में, यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी एक मिसाल बन सकता है, जहां गिग वर्करों की स्थिति समान रूप से चिंताजनक है। सरकार के इस कदम से गिग अर्थव्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी।

Summary
उत्तर प्रदेश सरकार का यह निर्णय गिग वर्करों को शोषण से मुक्ति दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। नए नियम न केवल उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे, बल्कि गिग कंपनियों को भी अधिक जवाबदेह बनाएंगे।
स्रोत: सार्वजनिक रूप से उपलब्ध समाचार स्रोत
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