देवरिया के प्राथमिक विद्यालयों में डिजिटल क्रांति की बात तो खूब होती है, लेकिन ज़मीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। हाल ही में एक निरीक्षण के दौरान सामने आया कि कई स्कूलों के महत्वपूर्ण डिजिटल कनेक्शन से जुड़े संपर्क नंबर अधिकारियों की जुबान पर नहीं हैं, जिससे व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।
- देवरिया के प्राथमिक विद्यालयों में डिजिटल कनेक्टिविटी की स्थिति पर सवालिया निशान लगा।
- निरीक्षण के दौरान संबंधित अधिकारियों को महत्वपूर्ण संपर्क नंबर याद नहीं थे।
- यह लापरवाही सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में बड़ी बाधा बन सकती है।
- इससे शिक्षक और छात्र दोनों ही डिजिटल शिक्षा के लाभ से वंचित हो सकते हैं।
- शिक्षा विभाग में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी एक बार फिर उजागर हुई।
उत्तर प्रदेश सरकार प्राथमिक शिक्षा में डिजिटल साक्षरता और कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी कड़ी में, देवरिया जिले के प्राथमिक विद्यालयों को भी इंटरनेट और अन्य डिजिटल माध्यमों से जोड़ा जा रहा है। इन 'कनेक्शंस' को सुचारू रूप से चलाने और किसी भी तकनीकी समस्या के समाधान के लिए संबंधित अधिकारियों और सेवा प्रदाताओं के मोबाइल नंबरों का उपलब्ध होना अत्यंत आवश्यक है। दुर्भाग्यवश, हालिया जांच में यह पाया गया कि कुछ महत्वपूर्ण संपर्क नंबरों का ब्यौरा अधिकारियों के पास मौजूद नहीं है, जो इस पूरी कवायद की गंभीरता पर सवाल उठाता है।
इस लापरवाही का सीधा असर विद्यालयों की कार्यप्रणाली और बच्चों की शिक्षा पर पड़ सकता है। यदि किसी स्कूल में इंटरनेट कनेक्टिविटी बाधित होती है या कोई तकनीकी खराबी आती है, तो संबंधित संपर्क नंबर न होने से समस्या का समाधान घंटों या दिनों तक लटका रह सकता है। यह स्थिति न केवल शिक्षकों के काम में बाधा डालेगी, बल्कि छात्रों को मिलने वाली डिजिटल शिक्षा भी प्रभावित होगी। इस घटना ने शिक्षा विभाग में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी को उजागर किया है, जिसके बाद अब उच्च अधिकारियों द्वारा इस मामले की जांच और संबंधित व्यक्तियों पर कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है, ताकि भविष्य में ऐसी चूक न हो।