नई दिल्ली। एक फरवरी 2026 को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अपना लगातार नौवां आम बजट पेश करने जा रही हैं। ऐसे समय में जब महंगाई, रोजगार और आयकर को लेकर आम लोगों की अपेक्षाएं बढ़ी हुई हैं, मध्यम वर्ग की निगाहें इस बजट पर खास तौर पर टिकी हुई हैं। आर्थिक सर्वेक्षण में विकास दर मजबूत रहने का संकेत जरूर मिला है, लेकिन आम उपभोक्ता की जेब पर दबाव भी साफ दिख रहा है। ऐसे में सवाल यह है कि क्या इस बार बजट में आयकर राहत और आम आदमी के लिए ठोस कदम देखने को मिलेंगे?
पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने नई कर व्यवस्था को बढ़ावा दिया है, लेकिन बड़ी संख्या में करदाता अभी भी पुरानी व्यवस्था को चुनते हैं। मध्यम वर्ग की सबसे बड़ी मांग आयकर छूट की सीमा बढ़ाने और कर स्लैब में संशोधन की है। जानकारों का मानना है कि यदि सरकार मूल छूट सीमा को बढ़ाती है या स्टैंडर्ड डिडक्शन में इजाफा करती है, तो इससे वेतनभोगी वर्ग को सीधा लाभ मिल सकता है।
इसके अलावा, गृह ऋण पर ब्याज छूट, स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम पर अतिरिक्त राहत और शिक्षा ऋण पर प्रावधानों में बदलाव जैसे कदम भी मध्यम वर्ग को राहत दे सकते हैं। बढ़ती महंगाई के बीच यदि करदाताओं की बचत बढ़ती है, तो खपत में सुधार संभव है, जिससे अर्थव्यवस्था को भी गति मिल सकती है।
कैपेक्स और इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस
पिछले बजटों में सरकार ने पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) को बढ़ाकर इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर दिया है। सड़क, रेल, हवाई अड्डों और डिजिटल ढांचे में निवेश से रोजगार सृजन और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिला है। उम्मीद की जा रही है कि इस बार भी सरकार पूंजीगत व्यय में कटौती नहीं करेगी, बल्कि इसे स्थिर या बढ़ाने का प्रयास करेगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश जारी रहता है तो इससे निर्माण, स्टील, सीमेंट और संबंधित उद्योगों को लाभ मिलेगा। इसका अप्रत्यक्ष फायदा मध्यम वर्ग और छोटे व्यवसायों तक पहुंच सकता है।
रोजगार और युवाओं पर संभावित घोषणाएं
देश की युवा आबादी बड़ी है और रोजगार सृजन सरकार के सामने बड़ी चुनौती है। स्टार्टअप, एमएसएमई और विनिर्माण क्षेत्र को प्रोत्साहन देने के लिए कर प्रोत्साहन या सब्सिडी योजनाओं की घोषणा संभव है। स्किल डेवलपमेंट कार्यक्रमों में विस्तार और डिजिटल रोजगार प्लेटफॉर्म को बढ़ावा देने की उम्मीद भी की जा रही है।
यदि बजट में रोजगार आधारित योजनाओं के लिए अतिरिक्त आवंटन किया जाता है, तो इससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में सकारात्मक असर देखने को मिल सकता है।
महंगाई और आम उपभोक्ता
खाद्य वस्तुओं और रोजमर्रा की जरूरतों की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने आम परिवारों के बजट को प्रभावित किया है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि सरकार आपूर्ति श्रृंखला सुधार और कृषि क्षेत्र में निवेश बढ़ाती है, तो दीर्घकाल में महंगाई पर नियंत्रण संभव है। इसके अलावा, उर्वरक और खाद्य सब्सिडी पर संतुलित रुख अपनाना भी जरूरी होगा।
राज्यों की उम्मीदें और सामाजिक योजनाएं
कई राज्य सरकारें केंद्र से अधिक वित्तीय सहयोग की अपेक्षा कर रही हैं। सामाजिक कल्याण योजनाओं, स्वास्थ्य और शिक्षा के लिए आवंटन बढ़ाने की मांग भी उठ रही है। यदि बजट में इन क्षेत्रों को प्राथमिकता मिलती है, तो इसका सीधा लाभ समाज के कमजोर वर्गों को मिल सकता है।
वैश्विक चुनौतियां और आर्थिक संतुलन
वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, कच्चे तेल की कीमतों और भू-राजनीतिक तनावों के बीच संतुलित बजट तैयार करना आसान नहीं है। सरकार के सामने राजकोषीय घाटा नियंत्रित रखने और विकास को बनाए रखने की दोहरी चुनौती है। आर्थिक सर्वेक्षण में विकास दर मजबूत रहने का अनुमान जरूर है, लेकिन घरेलू मांग को मजबूत बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है।
निष्कर्ष
Union Budget 2026 से मध्यम वर्ग को आयकर में राहत, रोजगार सृजन और महंगाई पर नियंत्रण जैसे ठोस कदमों की उम्मीद है। साथ ही, इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश और सामाजिक योजनाओं के माध्यम से दीर्घकालिक विकास की दिशा तय होने की संभावना है। अब सबकी नजर एक फरवरी को पेश होने वाले बजट पर है, जहां यह स्पष्ट होगा कि सरकार आम नागरिकों की अपेक्षाओं पर कितना खरी उतरती है।