लखनऊ में पतंगबाजी का शौक अक्सर जानलेवा नायलॉन मांझे की चपेट में आ जाता है। 'चाइनीज मांझा' के नाम से कुख्यात यह खतरनाक धागा दरअसल सिर्फ नाम का चीनी है, जबकि इसकी नायलॉन सामग्री ही असली जानलेवा है। हर साल यह अनगिनत लोगों और बेजुबान पक्षियों के लिए मौत का फंदा बन रहा है।
- नायलॉन मांझा, जिसे अक्सर 'चाइनीज मांझा' कहा जाता है, पूरी तरह प्रतिबंधित है।
- यह जानलेवा धागा इंसानों और पक्षियों के लिए गंभीर चोटों और मृत्यु का कारण बनता है।
- 'चाइनीज' शब्द सिर्फ एक भ्रामक नाम है
- इसकी नायलॉन और सिंथेटिक सामग्री ही खतरनाक है।
- प्रतिबंध के बावजूद, यह मांझा चोरी-छिपे बेचा और इस्तेमाल किया जा रहा है।
- प्रशासन को इसके निर्माण, बिक्री और उपयोग पर कड़ाई से अंकुश लगाने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।
पतंगबाजी का मौसम आते ही नायलॉन मांझे का खतरा एक बार फिर सिर उठाने लगता है। यह मांझा सामान्य सूती धागे से कई गुना अधिक मजबूत, धारदार और गैर-बायोडिग्रेडेबल होता है। कांच के चूर्ण और धातु के कणों से लेपित यह धागा बिजली का सुचालक भी होता है, जिससे बिजली के तारों के संपर्क में आने पर करंट लगने का खतरा बढ़ जाता है। दशकों से इसे 'चाइनीज मांझा' कहकर प्रचारित किया जाता रहा है, जबकि सच्चाई यह है कि यह चीन के अलावा भारत और अन्य देशों में भी समान खतरनाक सामग्री से बनाया जा रहा है, और इसका असली खतरा इसकी सिंथेटिक बनावट में निहित है।
लखनऊ में इस मांझे का कहर लगातार जारी है। अस्पतालों में ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है जो गले, हाथ या चेहरे पर गंभीर चोटों के साथ आते हैं। कई बार तो ये चोटें इतनी गहरी होती हैं कि जान तक चली जाती है। बेजुबान पक्षियों के लिए भी यह मांझा यमदूत साबित होता है, जिससे उनके पंख कट जाते हैं और वे उड़ने में असमर्थ हो जाते हैं। प्रशासन द्वारा समय-समय पर अभियान चलाए जाते हैं, लेकिन चोरी-छिपे इसकी बिक्री और उत्पादन पर पूरी तरह रोक लगाना एक बड़ी चुनौती है। इसके लिए न केवल सख्त कानूनी कार्रवाई, बल्कि जन जागरूकता और स्थानीय स्तर पर सूचना तंत्र को मजबूत करने की भी आवश्यकता है ताकि इस जानलेवा खेल पर पूर्ण विराम लग सके।