लखनऊ में एक साहित्यिक कार्यक्रम के दौरान पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा ने अपने इस्तीफे से जुड़े एक सवाल का जवाब बेहद अनोखे अंदाज में दिया। उन्होंने सियासी अटकलों के बीच एक शेर पढ़कर सभी को चौंका दिया, जिससे सभागार तालियों से गूँज उठा।
- लखनऊ के एक साहित्यिक मंच पर पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा मौजूद थे।
- उनसे उनके चुनाव आयुक्त पद से इस्तीफे के बारे में सवाल पूछा गया।
- लवासा ने सीधे जवाब देने के बजाय एक मार्मिक शेर पढ़ा।
- उनके शायराना जवाब ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों का ध्यान खींचा।
- इस घटना ने सार्वजनिक हस्तियों के जवाब देने के तरीके पर नई बहस छेड़ी।
यह घटना लखनऊ में आयोजित एक प्रतिष्ठित साहित्य उत्सव के दौरान हुई, जहाँ अशोक लवासा ने अपने अनुभव साझा किए। कार्यक्रम के दौरान जब एक प्रतिभागी ने उनसे उनके चुनाव आयुक्त पद से इस्तीफे और उसके पीछे की वजहों को लेकर सवाल किया, तो माहौल में थोड़ी गंभीरता आ गई। लवासा, जो अपनी स्पष्टवादिता के लिए जाने जाते हैं, ने इस संवेदनशील प्रश्न का उत्तर देने का एक अप्रत्याशित तरीका चुना। उन्होंने किसी सीधी टिप्पणी या स्पष्टीकरण से बचते हुए, अपनी बात एक शेर के माध्यम से रखी, जिसने सभी को सोचने पर मजबूर कर दिया।
लवासा का यह शायराना जवाब न केवल उनकी वाकपटुता को दर्शाता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि वे अपने अतीत के फैसलों पर किसी भी तरह की सीधी बहस से बचना चाहते हैं। उनके इस अंदाज ने कार्यक्रम में मौजूद बुद्धिजीवियों और पत्रकारों के बीच नई चर्चा छेड़ दी है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यह उनकी परिपक्वता और कूटनीति का प्रमाण है, जबकि अन्य इसे उनके व्यक्तित्व का एक नया पहलू मान रहे हैं। यह घटना भविष्य में ऐसे संवेदनशील सवालों पर सार्वजनिक हस्तियों द्वारा दिए जाने वाले जवाबों के लिए एक नया मानदंड स्थापित कर सकती है, जहाँ सीधे टकराव के बजाय कलात्मक अभिव्यक्ति का सहारा लिया जाए।