दिल्ली की जहरीली हवा पर अक्सर स्थानीय कारणों को जिम्मेदार ठहराया जाता रहा है, लेकिन सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) की एक नई रिपोर्ट ने इस धारणा को चुनौती दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, राजधानी के वायु प्रदूषण का एक बड़ा हिस्सा, लगभग 65 प्रतिशत, बाहरी स्रोतों से आता है, जो समाधान के लिए एक नई दिशा का संकेत देता है।
- CREA रिपोर्ट ने दिल्ली के प्रदूषण स्रोतों पर नया प्रकाश डाला है।
- रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली के वायु प्रदूषण में 65% योगदान बाहरी क्षेत्रों से आता है।
- यह खुलासा राजधानी के प्रदूषण को लेकर अब तक की मान्यताओं को बदलता है।
- स्थानीय कारणों के साथ-साथ क्षेत्रीय वायु गुणवत्ता पर ध्यान देने की आवश्यकता पर जोर।
- नीति निर्माताओं के लिए प्रदूषण नियंत्रण रणनीतियों पर पुनर्विचार का आह्वान।
दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में वायु प्रदूषण हर साल एक गंभीर चुनौती बनकर उभरता है, खासकर सर्दियों के महीनों में। अब तक, इस प्रदूषण के लिए अक्सर वाहनों, निर्माण गतिविधियों, औद्योगिक उत्सर्जन और पराली जलाने जैसे स्थानीय और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के भीतर के कारणों को प्रमुखता से जिम्मेदार ठहराया जाता रहा है। CREA की यह रिपोर्ट एक महत्वपूर्ण मोड़ प्रस्तुत करती है, जो यह दर्शाती है कि दिल्ली की अपनी सीमाएं प्रदूषण का एकमात्र या सबसे बड़ा स्रोत नहीं हैं, बल्कि पड़ोसी राज्यों से आने वाली प्रदूषित हवा का भी इसमें बड़ा हाथ है। यह विश्लेषण प्रदूषण की समस्या को एक व्यापक क्षेत्रीय परिप्रेक्ष्य से देखने पर जोर देता है।
इस खुलासे का असर दिल्ली और केंद्र सरकार की प्रदूषण नियंत्रण नीतियों पर दूरगामी हो सकता है। यह रिपोर्ट अब तक दिल्ली केंद्रित समाधानों से हटकर एक व्यापक क्षेत्रीय रणनीति अपनाने की आवश्यकता पर बल देती है। इससे पड़ोसी राज्यों, जैसे हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के साथ मिलकर वायु गुणवत्ता प्रबंधन के लिए अधिक प्रभावी समन्वय और सहयोग की मांग उठ सकती है। यह सिर्फ दिल्ली के निवासियों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए स्वच्छ हवा सुनिश्चित करने हेतु एक एकीकृत दृष्टिकोण विकसित करने का अवसर प्रदान करता है, जहां सभी स्टेकहोल्डर्स को अपनी भूमिका निभानी होगी और प्रदूषण के क्षेत्रीय आयाम को स्वीकार करना होगा।