देश की राजधानी दिल्ली में ठोस कचरा प्रबंधन की स्थिति बेहद चिंताजनक है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के एक वरिष्ठ वैज्ञानिक ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) में दाखिल हलफनामे में इस व्यवस्था की विफलता का चौंकाने वाला खुलासा किया है। यह खुलासा राजधानी के पर्यावरण और जनस्वास्थ्य पर मंडरा रहे गंभीर खतरे को उजागर करता है।
- CPCB के वैज्ञानिक ने NGT में दिल्ली के ठोस कचरा प्रबंधन को विफल बताया।
- हलफनामे में कचरा निस्तारण की मौजूदा प्रणालियों को अक्षम करार दिया गया।
- दिल्ली में कचरे के पहाड़ (लैंडफिल साइट्स) लगातार बढ़ रहे हैं, जिससे प्रदूषण फैल रहा है।
- यह खुलासा दिल्ली के नागरिक निकायों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाता है।
- जनस्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
यह खुलासा ऐसे समय में हुआ है जब राष्ट्रीय राजधानी पहले से ही वायु प्रदूषण और जल प्रदूषण जैसी गंभीर पर्यावरणीय चुनौतियों से जूझ रही है। NGT लंबे समय से दिल्ली में ठोस कचरा प्रबंधन की निगरानी कर रहा है और विभिन्न नागरिक निकायों को इस दिशा में सुधार के निर्देश देता रहा है। CPCB, एक शीर्ष नियामक संस्था होने के नाते, ने अपने वैज्ञानिक के माध्यम से यह स्पष्ट कर दिया है कि जमीनी स्तर पर स्थिति संतोषजनक नहीं है। हलफनामे में विशेष रूप से गाजीपुर, भलस्वा और ओखला जैसी लैंडफिल साइट्स पर कचरे के अंबार और उसके वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण में हो रही चूक पर प्रकाश डाला गया है।
इस खुलासे का दिल्ली के लाखों निवासियों के जीवन पर सीधा और गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। ठोस कचरे का अनुचित प्रबंधन न केवल भूजल को प्रदूषित करता है, बल्कि मीथेन जैसी ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन कर वायु गुणवत्ता को भी खराब करता है। इसके अलावा, कचरे के ढेरों पर अक्सर लगने वाली आग और उनसे उठने वाला धुआं श्वसन संबंधी बीमारियों का कारण बनता है। NGT अब इस हलफनामे के आधार पर संबंधित एजेंसियों पर और भी कड़े निर्देश या जुर्माना लगा सकता है। यह नागरिक निकायों के लिए एक वेक-अप कॉल है कि वे दशकों पुरानी कचरा निपटान प्रणाली को छोड़कर आधुनिक और टिकाऊ ठोस कचरा प्रबंधन नीतियों को तत्काल अपनाएं।