लखनऊ के अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय में कुलपति पद के लिए साक्षात्कार प्रक्रिया एक बार फिर टल गई है। यह तीसरा अवसर है जब इस महत्वपूर्ण पद के चयन में देरी हुई है, जिससे विश्वविद्यालय के प्रशासनिक कार्यों पर प्रश्नचिह्न लग गया है। इस लगातार हो रही देरी से शिक्षा जगत में चिंता का माहौल है।
- अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय में कुलपति चयन के साक्षात्कार तीसरी बार स्थगित।
- चयन समिति ने अपरिहार्य कारणों का हवाला दिया।
- कुलपति पद के लिए योग्य उम्मीदवारों का इंतजार बढ़ा।
- विश्वविद्यालय के शैक्षणिक और प्रशासनिक कार्यों पर अनिश्चितता का साया।
- अगली साक्षात्कार तिथि की घोषणा अभी नहीं की गई।
अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय, जो अपनी स्थापना के बाद से ही उच्च शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, पिछले कई महीनों से स्थायी कुलपति की प्रतीक्षा कर रहा है। कुलपति का पद रिक्त होने या कार्यवाहक व्यवस्था के तहत चलने से नीतिगत निर्णय और दीर्घकालिक योजनाएँ प्रभावित होती हैं। यह तीसरी बार है जब चयन समिति द्वारा प्रस्तावित साक्षात्कार को अंतिम समय में टाल दिया गया है, जिससे प्रक्रिया की पारदर्शिता और दक्षता पर सवाल उठ रहे हैं।
इस लगातार हो रही देरी का सीधा असर विश्वविद्यालय के अकादमिक कैलेंडर, शोध गतिविधियों और प्रशासनिक कामकाज पर पड़ रहा है। छात्रों के प्रवेश, परीक्षाओं के आयोजन और महत्वपूर्ण नियुक्तियों जैसे निर्णय अधर में लटके हुए हैं, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। शिक्षाविदों और विश्वविद्यालय समुदाय में इस अनिश्चितता को लेकर गहरी चिंता है। यह स्थिति विश्वविद्यालय की छवि को भी धूमिल कर सकती है और योग्य उम्मीदवारों को इस प्रक्रिया से विमुख कर सकती है, जो अंततः विश्वविद्यालय के भविष्य के लिए हानिकारक साबित होगा।