तहलका पत्रिका के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल को 2013 के दुष्कर्म मामले में सुप्रीम कोर्ट से कोई राहत नहीं मिली है। शीर्ष अदालत ने गोवा हाईकोर्ट द्वारा दी गई सजा पर रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया है, जिससे उनके खिलाफ कानूनी कार्यवाही जारी रहेगी।
- सुप्रीम कोर्ट ने तरुण तेजपाल की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने सजा पर रोक लगाने की मांग की थी।
- तेजपाल ने गोवा हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें बरी करने के आदेश को पलटा गया था।
- यह मामला नवंबर 2013 में एक महिला सहकर्मी द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोप से संबंधित है।
- गोवा की निचली अदालत ने 2021 में तेजपाल को बरी कर दिया था, जिसे गोवा सरकार ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
- सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद तेजपाल के कानूनी विकल्प सीमित हो गए हैं।
तेजपाल के खिलाफ यह मामला नवंबर 2013 का है, जब तहलका पत्रिका की एक पूर्व महिला सहयोगी ने उन पर गोवा के एक होटल में यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। इस मामले में लंबी कानूनी प्रक्रिया चली और मई 2021 में गोवा की एक निचली अदालत ने तरुण तेजपाल को सभी आरोपों से बरी कर दिया था। हालांकि, गोवा सरकार ने इस फैसले को गोवा हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने मई 2023 में निचली अदालत के बरी करने के फैसले को पलटते हुए तेजपाल के खिलाफ आगे की कार्यवाही का आदेश दिया, जिसे तेजपाल ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला तरुण तेजपाल के लिए एक बड़ा झटका है और उनके कानूनी संघर्ष को और बढ़ा देगा। अब उन्हें गोवा हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार आगे की कानूनी प्रक्रिया का सामना करना होगा, जिसका अर्थ है कि उन्हें फिर से मुकदमे का सामना करना पड़ सकता है। इस फैसले से न्यायपालिका में पीड़ित महिलाओं के विश्वास को बल मिलेगा और यह संदेश जाएगा कि हाई-प्रोफाइल मामलों में भी कानून अपना काम करता है। यह मामला पत्रकारिता जगत और समाज में यौन उत्पीड़न के खिलाफ जागरूकता के लिहाज से भी महत्वपूर्ण रहा है। तेजपाल के पास अब केवल पुनर्विचार याचिका का विकल्प बचा है, लेकिन उसमें भी राहत मिलने की संभावना कम ही होती है।