राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली एक बार फिर गंभीर वायु प्रदूषण की चपेट में आ गई है। पराली जलाने और वाहनों से निकलने वाले धुएं ने शहर की हवा को जहरीला बना दिया है, जिससे लोगों का सांस लेना मुश्किल हो गया है।
- दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 'बहुत खराब' से 'गंभीर' श्रेणी में पहुंच गया है।
- पड़ोसी राज्यों में पराली जलाना और दिल्ली में वाहनों का धुआं प्रदूषण के मुख्य कारण हैं।
- मौसम विभाग ने अगले तीन दिनों तक हवा की गुणवत्ता में और गिरावट की आशंका जताई है।
- बच्चों, बुजुर्गों और सांस के मरीजों के लिए यह स्थिति विशेष रूप से खतरनाक है।
- प्रशासन ने ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के तहत प्रतिबंधों को लागू किया है।
हर साल सर्दी की शुरुआत के साथ ही दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण एक गंभीर चुनौती बन जाता है। इस साल भी, तापमान में गिरावट, हवा की गति में कमी और पड़ोसी राज्यों, विशेषकर पंजाब और हरियाणा, में बड़े पैमाने पर पराली जलाने की घटनाओं ने स्थिति को भयावह बना दिया है। इसके साथ ही, दिल्ली के भीतर वाहनों और औद्योगिक उत्सर्जन का लगातार योगदान हवा को सांस लेने लायक नहीं छोड़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि हवा में सूक्ष्म कणों (PM2.5 और PM10) की सांद्रता सुरक्षित स्तर से कई गुना अधिक हो गई है, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य पर सीधा खतरा मंडरा रहा है।
इस जहरीली हवा का सीधा असर दिल्ली और आसपास के इलाकों में रहने वाले लाखों लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। अस्पतालों में सांस संबंधी बीमारियों के मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा देखा जा रहा है। डॉक्टरों ने लोगों को अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलने, मास्क पहनने और बच्चों व बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी है। सरकार ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए GRAP के विभिन्न चरणों को लागू किया है, जिसमें निर्माण गतिविधियों पर रोक, ट्रकों के प्रवेश पर प्रतिबंध और ऑड-ईवन योजना जैसे उपाय शामिल हो सकते हैं। अगले तीन दिनों में वायुमंडलीय परिस्थितियों में सुधार की संभावना कम होने के कारण, प्रशासन को और सख्त कदम उठाने पड़ सकते हैं, जिससे आम जनजीवन पर भी असर पड़ेगा।