कुशीनगर के जवही दयाल क्षेत्र में नारायणी नदी (गंडक) का विकराल रूप देखने को मिल रहा है। नदी की बैक रोलिंग के कारण तटबंध और कृषि भूमि का तेजी से कटान हो रहा है, जिससे स्थानीय निवासियों में दहशत का माहौल है। प्रशासन और ग्रामीण मिलकर बचाव कार्यों में जुटे हुए हैं।
- कुशीनगर के जवही दयाल गांव में नारायणी नदी की बैक रोलिंग से तीव्र कटान जारी है।
- नदी का पानी तेजी से कृषि भूमि और तटबंधों को अपनी चपेट में ले रहा है।
- स्थानीय प्रशासन ने सिंचाई विभाग के साथ मिलकर बचाव कार्य शुरू कर दिया है।
- बोरी में बालू भरकर और पत्थर डालकर कटान रोकने का प्रयास किया जा रहा है।
- कटान से कई एकड़ फसलें और रिहायशी इलाके खतरे में पड़ गए हैं।
कुशीनगर जिले में बहने वाली नारायणी नदी, जिसे गंडक के नाम से भी जाना जाता है, मानसून के दौरान अक्सर अपना विकराल रूप दिखाती है। इस बार, जवही दयाल गांव के पास नदी की धारा में आए बदलाव और 'बैक रोलिंग' प्रभाव के कारण तटबंधों पर गंभीर दबाव पड़ रहा है। 'बैक रोलिंग' की स्थिति तब उत्पन्न होती है जब नदी का पानी एक विपरीत दिशा में घूमकर किनारे पर अधिक बल लगाता है, जिससे मिट्टी का कटाव तीव्र गति से होता है। पिछले कुछ दिनों से जारी यह कटान अब चिंताजनक स्तर पर पहुंच गया है, जिससे किसानों की सैकड़ों एकड़ भूमि नदी में समा चुकी है।
इस गंभीर कटान का सीधा असर जवही दयाल और आसपास के गांवों के किसानों पर पड़ रहा है, जिनकी आजीविका खेती पर निर्भर है। यदि कटान पर जल्द काबू नहीं पाया गया, तो यह न केवल कृषि भूमि को नष्ट करेगा, बल्कि आवासीय क्षेत्रों और महत्वपूर्ण ढांचों को भी खतरे में डाल सकता है। स्थानीय लोगों में भय का माहौल है और वे प्रशासन से स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं। बचाव कार्य के तहत बालू भरी बोरियां और बोल्डर डाले जा रहे हैं, लेकिन नदी के तेज बहाव और बैक रोलिंग के कारण यह कार्य चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। भविष्य में ऐसी स्थिति से निपटने के लिए दीर्घकालिक योजनाओं पर विचार करना आवश्यक है, जिसमें तटबंधों का सुदृढ़ीकरण और नदी के प्रवाह का अध्ययन शामिल हो।