पवित्र कांवड़ यात्रा के दौरान दिल्ली-जयपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर कांवड़ियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सर्विस लेन पर वाहनों की बढ़ती संख्या उनकी यात्रा में लगातार बाधा डाल रही है, जिससे सुरक्षा और समय दोनों पर असर पड़ रहा है।
- दिल्ली-जयपुर राष्ट्रीय राजमार्ग की सर्विस लेन पर कांवड़ियों को असुविधा।
- सामान्य वाहनों की आवाजाही से यात्रा में बाधा।
- सुरक्षा का खतरा और दुर्घटनाओं की आशंका।
- ट्रैफिक प्रबंधन में खामियां उजागर।
- प्रशासन से बेहतर व्यवस्था की अपील।
हर साल सावन माह में लाखों श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक करने के लिए कांवड़ यात्रा पर निकलते हैं। इनमें से बड़ी संख्या में कांवड़िए दिल्ली-जयपुर राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-48) के रास्ते हरिद्वार और गोमुख से जल लेकर आते हैं। प्रशासन द्वारा मुख्य हाईवे पर उनके लिए विशेष लेन आरक्षित की जाती है, लेकिन सहायक सर्विस लेन पर स्थानीय और अन्य वाहनों की बेतरतीब आवाजाही उनकी सुरक्षित यात्रा में बड़ा व्यवधान बन रही है। यह समस्या विशेषकर गुरुग्राम और राजस्थान सीमा के निकटवर्ती क्षेत्रों में अधिक देखी जा रही है।
इस अव्यवस्था के कारण कांवड़ियों को न केवल अपनी यात्रा पूरी करने में अधिक समय लग रहा है, बल्कि लगातार दुर्घटनाओं का जोखिम भी बना हुआ है। कई बार तेज रफ्तार वाहन सर्विस लेन पर अचानक आ जाते हैं, जिससे पैदल चल रहे कांवड़ियों के लिए खतरा पैदा हो जाता है। स्थानीय निवासियों और अन्य यात्रियों को भी जाम की समस्या से जूझना पड़ रहा है, जिससे उनका दैनिक आवागमन प्रभावित हो रहा है। प्रशासन को इस पर गंभीरता से विचार करते हुए सर्विस लेन पर कांवड़ियों के लिए स्पष्ट और सुरक्षित गलियारे सुनिश्चित करने होंगे, ताकि यह धार्मिक यात्रा सुचारु और सुरक्षित ढंग से संपन्न हो सके।