उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में बिजली संकट गहरा गया है। शहरी क्षेत्रों के लिए निर्धारित फीडरों पर ग्रामीण इलाकों का अतिरिक्त भार पड़ने से आपूर्ति व्यवस्था चरमरा गई है। इससे शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के उपभोक्ताओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
- देवरिया में शहरी फीडर ग्रामीण इलाकों के भार से ओवरलोड हो रहे हैं।
- इस कारण शहरी क्षेत्रों में भी लगातार बिजली कटौती और लो-वोल्टेज की समस्या बढ़ी है।
- बिजली विभाग के अनुसार, कई ग्रामीण कनेक्शन अनधिकृत रूप से शहरी लाइनों से जुड़े हैं।
- इससे शहरी उपभोक्ताओं को भी निर्धारित घंटों से कम बिजली मिल रही है।
- यह स्थिति जिले में बिजली आपूर्ति व्यवस्था के कुप्रबंधन को उजागर करती है।
देवरिया जिले में बिजली आपूर्ति की व्यवस्था लंबे समय से चुनौतियों का सामना कर रही है। हालिया स्थिति यह है कि कई ग्रामीण क्षेत्रों को बिजली पहुंचाने के लिए शहरी फीडरों का उपयोग किया जा रहा है, या फिर ग्रामीण क्षेत्रों के उपभोक्ता अनधिकृत रूप से शहरी फीडरों से जुड़ गए हैं। इस अव्यवस्था के कारण शहरी क्षेत्रों के लिए डिज़ाइन किए गए फीडर अपनी क्षमता से अधिक भार वहन कर रहे हैं। परिणामस्वरूप, शहरी उपभोक्ताओं को भी पर्याप्त और स्थिर बिजली नहीं मिल पा रही है, जिससे उनकी दैनिक दिनचर्या और व्यवसाय प्रभावित हो रहे हैं।
इस बिजली संकट का सीधा असर देवरिया के आम जनजीवन पर पड़ रहा है। लगातार कटौती से गर्मी में लोगों का जीना मुहाल हो गया है, वहीं छोटे व्यापारियों और उद्योगों को भी भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य सेवाओं पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। बिजली विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वे इस समस्या के समाधान के लिए अभियान चलाकर अवैध कनेक्शनों की पहचान कर रहे हैं और लोड प्रबंधन को बेहतर बनाने के प्रयास कर रहे हैं। हालांकि, जब तक ग्रामीण क्षेत्रों के लिए पर्याप्त और स्वतंत्र फीडर व्यवस्था स्थापित नहीं हो जाती, तब तक यह समस्या बनी रहने की आशंका है।