देवरिया के सरकारी नेत्र चिकित्सालय में एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। एक नेत्र परीक्षक अपनी संविदा अवधि समाप्त होने के बावजूद लंबे समय से ड्यूटी पर तैनात था, जिससे स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। यह घटना सरकारी नियुक्तियों में पारदर्शिता और निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
- नेत्र परीक्षक का संविदा अनुबंध निर्धारित अवधि से पहले ही समाप्त हो गया था।
- इसके बावजूद वह महीनों तक नेत्र चिकित्सालय में अपनी सेवाएं देता रहा।
- यह मामला देवरिया के मुख्य नेत्र चिकित्सालय से संबंधित है।
- प्रशासनिक स्तर पर घोर लापरवाही और निगरानी तंत्र की विफलता उजागर हुई है।
- इस प्रकरण में अब उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए जाने की प्रबल संभावना है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, देवरिया जिले के एक प्रमुख नेत्र चिकित्सालय में कार्यरत एक नेत्र परीक्षक की संविदा सेवा अवधि आधिकारिक तौर पर कुछ माह पूर्व ही समाप्त हो चुकी थी। नियमों के तहत, अनुबंध समाप्त होने के बाद संबंधित कर्मचारी को तत्काल प्रभाव से अपनी ड्यूटी बंद कर देनी चाहिए थी। लेकिन, सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि यह कर्मचारी न केवल अस्पताल में अपनी सेवाएं देता रहा, बल्कि उसने इस अवधि का वेतन भी प्राप्त किया। यह गंभीर अनियमितता तब उजागर हुई जब विभागीय स्तर पर दस्तावेजों की पड़ताल की गई या किसी शिकायत पर जांच शुरू हुई।
इस गंभीर अनियमितता ने न केवल अस्पताल प्रशासन बल्कि पूरे स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। एक संविदा समाप्त कर्मचारी द्वारा मरीजों की जांच करना न केवल कानूनी रूप से अनुचित है, बल्कि यह मरीजों की सुरक्षा और स्वास्थ्य के साथ भी खिलवाड़ हो सकता है। इस घटना से जिले में सरकारी नियुक्तियों और संविदा कर्मचारियों की निगरानी प्रणाली में बड़े सुधार की आवश्यकता महसूस की जा रही है। उम्मीद है कि इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित कर्मचारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी ताकि भविष्य में ऐसी चूक की पुनरावृत्ति न हो।