एक मां की आँखों से आँसू रुकने का नाम नहीं ले रहे, जबकि एक पिता की नि:शब्द खामोशी पूरे घर में पसरी हुई है। दूर परदेस में एक सड़क हादसे में बेटे की मौत के बाद, परिवार उसकी पार्थिव देह के आने का इंतजार कर रहा है। यह इंतजार केवल एक शव का नहीं, बल्कि अंतिम दर्शन की अधूरी उम्मीद का है।
- एक युवा की दूसरे राज्य में सड़क दुर्घटना में दुखद मृत्यु हो गई।
- मृतक के माता-पिता अपने बेटे के शव के घर पहुंचने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
- प्रशासनिक प्रक्रियाओं और दूरी के कारण शव लाने में देरी हो रही है।
- परिवार गहरे सदमे और असहनीय पीड़ा से गुजर रहा है।
- स्थानीय समुदाय और रिश्तेदार शोक संतप्त परिवार को ढांढस बंधा रहे हैं।
उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गाँव रामनगर में इस समय मातम पसरा हुआ है। गाँव के युवा रवि (बदला हुआ नाम) करीब दो साल पहले बेहतर रोजगार की तलाश में बेंगलुरु गया था। पिछले हफ्ते, उसे एक सड़क दुर्घटना में गंभीर चोटें आईं और अस्पताल में इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। रवि अपने परिवार का इकलौता कमाने वाला सदस्य था और उसके माता-पिता उसी की कमाई पर निर्भर थे। खबर मिलते ही पूरे गाँव में शोक की लहर दौड़ गई, लेकिन असली दर्द तो रवि के घर में शुरू हुआ, जहाँ उसकी माँ और पिता बेसुध पड़े हैं।
रवि के शव को बेंगलुरु से रामनगर लाने की प्रक्रिया में देरी हो रही है, जिससे परिवार की पीड़ा और बढ़ गई है। कागजी कार्रवाई, पोस्टमार्टम और परिवहन की जटिलताओं के कारण शव को गाँव तक पहुंचने में अभी कुछ दिन और लग सकते हैं। इस इंतजार ने मां को पूरी तरह तोड़ दिया है, वे बार-बार बेटे का नाम पुकार रही हैं, वहीं पिता सदमे में हैं और उनकी खामोशी घर के हर कोने में गूंज रही है। स्थानीय प्रशासन ने परिवार को हर संभव मदद का आश्वासन दिया है, लेकिन वक्त की हर बीतती घड़ी उनके लिए सदियों जैसी लग रही है। इस घटना ने एक बार फिर उन परिवारों की मुश्किलों को उजागर किया है जिनके बच्चे दूर शहरों में काम करते हुए ऐसी त्रासदी का शिकार होते हैं।