राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में मॉनसून का इंतजार आखिरकार खत्म हुआ, लेकिन इस बार इसकी दस्तक थोड़ी देर से हुई है। यह साल 2021 के बाद पहली बार है जब मॉनसून ने जुलाई में दिल्ली में प्रवेश किया है, जिससे शहरवासियों को भीषण गर्मी से राहत मिली है।
- दिल्ली में मॉनसून ने इस बार जुलाई में दस्तक दी है, जो सामान्य समय से विलंब है।
- यह साल 2021 के बाद पहली बार है जब राजधानी में मॉनसून जुलाई में पहुंचा है।
- पिछले 26 वर्षों में यह 13वीं बार है जब मॉनसून ने जुलाई के महीने में दिल्ली में प्रवेश किया है।
- मॉनसून की इस देरी से दिल्लीवासियों को भीषण गर्मी और उमस से जूझना पड़ा।
- मौसम विभाग के अनुसार, मॉनसून की धीमी गति इसका एक प्रमुख कारण रही।
दिल्ली में मॉनसून का सामान्य आगमन 27 जून माना जाता है। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों से इसके आगमन की तारीखों में बदलाव देखा जा रहा है। इस साल, मॉनसून ने अपने निर्धारित समय पर केरल में प्रवेश किया था, लेकिन उत्तरी भारत की ओर इसकी प्रगति धीमी रही। 2021 में भी मॉनसून जुलाई में ही दिल्ली पहुंचा था, जबकि 2022 और 2023 में यह सामान्य समय पर आया था। पिछले 26 वर्षों के आंकड़ों पर गौर करें तो, 13 बार ऐसा हुआ है जब दिल्ली को मॉनसून के लिए जुलाई तक इंतजार करना पड़ा है, जो जलवायु परिवर्तन और क्षेत्रीय मौसम पैटर्न में बदलाव का संकेत देता है।
मॉनसून की देरी का सीधा असर दिल्ली के जनजीवन पर पड़ा है। भीषण गर्मी और उमस के कारण लोगों को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ा, वहीं पानी की खपत में भी वृद्धि देखी गई। कृषि के दृष्टिकोण से देखें तो, दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में खरीफ की फसलों की बुवाई पर भी इसका कुछ प्रभाव पड़ सकता है, हालांकि दिल्ली में कृषि भूमि सीमित है। आने वाले दिनों में, मॉनसून की सक्रियता से तापमान में गिरावट और वायु गुणवत्ता में सुधार की उम्मीद है। हालांकि, देरी से मॉनसून के कारण अचानक और तेज बारिश से शहरी बाढ़ का खतरा भी बढ़ जाता है, जिससे जल निकासी व्यवस्था पर दबाव पड़ सकता है। प्रशासन को जलभराव से निपटने के लिए तैयार रहना होगा।