दिल्ली ने अपने प्रदूषण से लड़ने और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए एक और बड़ा कदम उठाया है। नई इलेक्ट्रिक वाहन नीति 2026 को मंजूरी मिल गई है, जो 1 जुलाई से लागू होगी। यह नीति राजधानी में ईवी अपनाने की गति को तेज करने का लक्ष्य रखती है।
- नई इलेक्ट्रिक वाहन नीति 1 जुलाई 2024 से पूरे दिल्ली में प्रभावी होगी।
- इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने पर मौजूदा सब्सिडी और प्रोत्साहन जारी रहेंगे, कुछ में बदलाव संभव।
- चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार और सुलभता पर विशेष जोर दिया जाएगा।
- पुराने पेट्रोल और डीजल वाहनों को इलेक्ट्रिक में बदलने के लिए भी प्रोत्साहन दिए जाएंगे।
- ई-कॉमर्स और डिलीवरी फ्लीट के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों को अनिवार्य करने का लक्ष्य रखा गया है।
दिल्ली लंबे समय से वायु प्रदूषण की गंभीर समस्या से जूझ रही है, जिसमें वाहनों से निकलने वाला धुआं एक प्रमुख कारक है। इस चुनौती से निपटने के लिए, दिल्ली सरकार ने 2020 में अपनी पहली ईवी नीति पेश की थी, जिसने इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में उल्लेखनीय वृद्धि की और भारत में ईवी क्रांति का मार्ग प्रशस्त किया। अब, उस नीति की सफलता को आगे बढ़ाते हुए और वैश्विक पर्यावरणीय लक्ष्यों के अनुरूप, नई ईवी नीति 2026 को अंतिम रूप दिया गया है। इसका उद्देश्य न केवल प्रदूषण के स्तर को और कम करना है, बल्कि दिल्ली को भारत की ईवी राजधानी के रूप में स्थापित करना भी है।
इस नई नीति का सीधा असर दिल्ली के हर नागरिक पर पड़ेगा। इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए आसान पहुंच और वित्तीय प्रोत्साहन से आम लोग इन्हें अपनाने के लिए प्रेरित होंगे, जिससे सड़कों पर पेट्रोल-डीजल वाहनों की संख्या धीरे-धीरे कम होगी और हवा की गुणवत्ता में सुधार होगा। चार्जिंग स्टेशनों का बढ़ता जाल ईवी मालिकों के लिए सुविधा बढ़ाएगा और "रेंज एंग्जाइटी" को कम करेगा। साथ ही, यह नीति ऑटोमोबाइल उद्योग में निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा करेगी, विशेष रूप से ईवी विनिर्माण और संबंधित सेवाओं के क्षेत्र में। हालांकि, इसके सफल क्रियान्वयन के लिए पर्याप्त चार्जिंग सुविधाओं, बैटरी रीसाइक्लिंग और कुशल कार्यबल के विकास जैसे पहलुओं पर भी लगातार ध्यान देना होगा।